पाकिस्तान ने फिस्कल ईयर 2026 के लिए अपने जीडीपी ग्रोथ टारगेट को **3.70%** से घटाकर **3.65%** कर दिया है। औद्योगिक उत्पादन में सुस्ती और गिरती मांग के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है।
ग्रोथ टारगेट में कटौती क्यों?
नेशनल अकाउंट्स कमेटी की हालिया बैठक में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का नया लेखा-जोखा सामने आया है। देश की कुल इकोनॉमिक आउटपुट अब $450.4 बिलियन रहने का अनुमान है। ग्रोथ अनुमानों में यह कटौती मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में आई कमजोरी की वजह से की गई है।
सेक्टरवार प्रदर्शन:
- लार्ज-स्केल मैन्युफैक्चरिंग: इसकी ग्रोथ का योगदान 6.11% से गिरकर 5.01% पर आ गया है।
- रिटेल ट्रेड: रिटेल और होलसेल ट्रेड में बड़ी गिरावट दिखी है, जहां ग्रोथ 3.71% से लुढ़ककर 2.37% पर आ गई है। इसका मुख्य कारण इंपोर्ट में कमी और कम मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट है।
- माइनिंग और क्वारी: राहत की बात सिर्फ माइनिंग सेक्टर से आई है, जहां कोयला, गैस और क्रूड ऑयल के बेहतर उत्पादन के कारण ग्रोथ 1.52% दर्ज की गई है।
आम आदमी पर महंगाई की मार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) बढ़कर $1,896 हो गई है, लेकिन बेतहाशा महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ रखी है। उच्च महंगाई के कारण लोगों की खर्च करने की क्षमता और सेविंग पर सीधा असर पड़ा है।
पाकिस्तान का यह नया अनुमान अब International Monetary Fund (IMF) और World Bank के प्रोजेक्शन के दायरे में आ गया है, जो पहले से ही 3.6% से 3.7% के बीच ग्रोथ का अनुमान जता रहे थे। आने वाले समय में इकोनॉमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती मैन्युफैक्चरिंग को पटरी पर लाना और इंपोर्ट से जुड़ी अड़चनों को दूर करना होगी।
