देश की सरकारी कंपनियों ने बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाने के अपने प्लान को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। निवेशक ब्याज दरें बढ़ने की आशंका के चलते ऊंचे रिटर्न (Yield) की मांग कर रहे हैं, जिसे पूरा करने के बजाय SIDBI और Sagarmala Finance जैसे बड़े नाम अपने इश्यू वापस ले रहे हैं।
भारतीय कॉर्पोरेट डेट मार्केट में फिलहाल एक गतिरोध (Standoff) देखने को मिल रहा है। सरकारी कंपनियां, जिन्हें PSU कहा जाता है, ऊंचे ब्याज दर के माहौल को देखते हुए नए बॉन्ड इश्यू लाने से कतरा रही हैं। निवेशकों का मानना है कि आने वाले समय में ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, इसलिए वे अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए अधिक कूपन या यील्ड की मांग कर रहे हैं। इस डिमांड और कंपनियों के बजट के बीच बड़ा अंतर (Pricing Gap) पैदा हो गया है।
प्रमुख घटनाक्रम
हाल ही में Small Industries Development Bank of India (SIDBI) ने अपने ₹6,000 करोड़ के बॉन्ड इश्यू को रद्द कर दिया। कंपनी का लक्ष्य कम लागत पर फंड जुटाना था, लेकिन निवेशक 7.85% से 8.1% तक के यील्ड की मांग कर रहे थे, जो कंपनी के आंतरिक लक्ष्यों से ज्यादा था। ठीक इसी तरह, Sagarmala Finance Corp ने भी अपने ₹600 करोड़ के 'ब्लू बॉन्ड' को तब वापस ले लिया जब उसे 8.30% से 8.40% के रेंज में बोलियां मिलीं, जबकि कंपनी का लक्ष्य लागत को 8% के नीचे रखना था।
प्राइवेट सेक्टर का अलग रुख
सरकारी कंपनियों के उलट, प्राइवेट कंपनियां और NBFCs बाजार की मौजूदा हकीकत को स्वीकार कर रही हैं और अपना फंड जुटाने का काम जारी रखे हुए हैं। इस फाइनेंशियल ईयर में इश्यू वॉल्यूम का बड़ा हिस्सा इन्हीं प्राइवेट प्लेयर्स के जरिए आ रहा है।
PSU की नई रणनीति: बैंक लोन
सरकारी कंपनियों ने अब लंबी अवधि के लिए ऊंचे ब्याज का बोझ ढोने के बजाय 'लचीलापन' (Flexibility) अपना लिया है। खजांची अब बॉन्ड मार्केट की जगह बैंक लोन और अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वहीं, सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जहां 10-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड सितंबर के अंत में 7.16% से 7.17% के दो साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया था।
अब बाजार की नजर Reserve Bank of India की पॉलिसी पर टिकी है। यदि ब्याज दरों में स्थिरता आती है, तो ही सरकारी कंपनियां दोबारा बॉन्ड मार्केट में मजबूती से उतरती दिख सकती हैं।
