सरकार के PM-SETU प्रोग्राम ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में ITI क्लस्टर्स के अपग्रेडेशन के लिए **₹735.70 करोड़** की मंजूरी दे दी है। इस कदम के साथ ही स्कीम का कुल निवेश बढ़कर **₹2,171 करोड़** हो गया है, जिसमें प्राइवेट सेक्टर की बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।
बड़े प्रोजेक्ट्स की नई शुरुआत
नेशनल स्टीयरिंग कमेटी की पांचवीं बैठक में PM-SETU (Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) कार्यक्रम के तहत ₹735.70 करोड़ के स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान को मंजूरी दी गई है। यह फंड मुख्य रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक बनाने में खर्च होगा।
हब-एंड-स्पोक मॉडल का असर
सरकार अब पुराने ढर्रे को बदलकर 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल अपना रही है। इसमें एक मुख्य 'हब' ITI बाकी छोटे संस्थानों के साथ संसाधनों और उपकरणों को शेयर करेगा। इससे ट्रेनिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर और भी बेहतर और एफिशिएंट बनेगा, जो आज की इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक है।
प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि इस स्कीम में H.G. Infra Engineering और ZEN Technologies जैसी प्राइवेट कंपनियों को इंडस्ट्री पार्टनर्स बनाया गया है। ये कंपनियां न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करेंगी, बल्कि करिकुलम को भी मॉडर्न बनाएंगी ताकि स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री-रेडी बनाया जा सके।
राजस्थान में पहली डील
राजस्थान ने भिवाड़ी (Bhiwadi) ITI क्लस्टर के लिए सरकारी तौर पर 'शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट' (SHA) साइन कर लिया है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में कब ये एग्रीमेंट फाइनल होते हैं, क्योंकि यही कॉन्ट्रैक्ट्स प्रोजेक्ट की असली शुरुआत और कैपिटल स्पेंडिंग का संकेत देंगे।
निवेशकों के लिए रिस्क और फैक्टर्स
हालांकि यह स्कीम बड़ी है, लेकिन ऐसे प्रोजेक्ट्स में एग्जीक्यूशन देरी और मार्जिन पर दबाव का रिस्क हमेशा रहता है। निवेशकों को सलाह है कि वे प्रोजेक्ट्स के टाइमलाइन और कैश फ्लो की प्रगति पर बारीकी से नजर रखें, क्योंकि यही कंपनियां के लॉन्ग-टर्म रिटर्न को तय करेगा।
