BRICS Business Forum: पीएम मोदी ने दी नई राह, सिक्योर सप्लाई चेन और डिजिटल पेमेंट पर जोर

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AuthorAditya Rao|Published at:
BRICS Business Forum: पीएम मोदी ने दी नई राह, सिक्योर सप्लाई चेन और डिजिटल पेमेंट पर जोर

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum में पीएम नरेंद्र मोदी ने सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की वकालत की है। इसका मकसद ग्लोबल प्रोटेक्शनिज्म को टक्कर देना और सदस्य देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है, जो दुनिया की **40%** GDP को कवर करते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum को संबोधित करते हुए 18वें BRICS समिट की नींव रखी। वैश्विक व्यापार में बढ़ती तनातनी के बीच, भारत ने सुरक्षित और विविध सप्लाई चेन बनाने की सख्त जरूरत पर जोर दिया। इस संबोधन का मुख्य फोकस आपसी सहयोग और लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक रेजिलिएंस पर रहा।

प्रोटेक्शनिज्म को मात देने की तैयारी

फोरम का सबसे अहम संदेश ट्रेड बैरियर्स को कम करना था। चूंकि BRICS ब्लॉक दुनिया की 40% GDP और 50% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, पीएम ने बताया कि ये देश मिलकर एक अधिक स्थिर ग्लोबल इकोनॉमी बना सकते हैं। फोकस अब प्रोटेक्शनिज्म से हटकर एनर्जी, टेक्नोलॉजी और जरूरी कमोडिटी के लिए विश्वसनीय कॉरिडोर बनाने पर है। निवेशकों के लिए यह संकेत बड़ा है, क्योंकि इससे भू-राजनीतिक विवादों (Geopolitical Conflicts) के कारण सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों को कम किया जा सकेगा।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ का इंजन

चर्चा का एक प्रमुख केंद्र BRICS देशों के बीच डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ना रहा। भारत सरकार ने UPI (Unified Payments Interface) को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मॉडल के रूप में पेश किया है। इसका मकसद क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन को आसान बनाना और इंटरनेशनल फाइनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम पर निर्भरता को कम करना है। इसके अलावा, लोकल करेंसी में व्यापार करने की योजना का लक्ष्य सदस्य देशों को ग्लोबल करेंसी मार्केट की अस्थिरता से बचाना और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को घटाना है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

भले ही समिट में लंबी अवधि के सहयोग की बात की गई हो, लेकिन इसका असल असर इन पहलों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। निवेशकों को क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट लिंकेज की टाइमलाइन और ट्रेड बैरियर्स को कम करने के समझौतों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। फिलहाल ग्लोबल लेवल पर अस्थिरता और ट्रेड फ्रेगमेंटेशन जैसे जोखिम बने हुए हैं, जो इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स को प्रभावित कर सकते हैं। इन प्रोजेक्ट्स से मिलने वाले अपडेट्स यह तय करेंगे कि BRICS ब्लॉक भविष्य में महंगाई के दबाव को कम करने और नए ग्रोथ अवसर पैदा करने में कितना सफल होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.