प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं से ग्लोबल 'Big Four' को चुनौती देने वाली भारतीय कंसल्टिंग और अकाउंटिंग फर्म्स बनाने का आह्वान किया है। यह कदम डेटा सुरक्षा और देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साहसिक आर्थिक विजन रखा है। सरकार अब ऐसी स्वदेशी प्रोफेशनल सर्विस दिग्गज कंपनियां खड़ी करना चाहती है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की 'Big Four' यानी Deloitte, EY, KPMG और PwC जैसी फर्मों को टक्कर दे सकें।
आर्थिक आत्मनिर्भरता और वैल्यू कैप्चर
फिलहाल इन विदेशी फर्मों का भारतीय मार्केट पर दबदबा है। जानकारों के अनुसार, भारत में इनका कुल रेवेन्यू ₹38,000 करोड़ से ₹45,000 करोड़ के बीच है। सरकार का मकसद इस भारी वैल्यू को घरेलू कंपनियों में शिफ्ट करना है ताकि डेटा सुरक्षा और आईपी (IP) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत खुद निर्णय ले सके।
नीतिगत और रेगुलेटरी बाधाएं
सिर्फ हौसला काफी नहीं है, इस लक्ष्य को पाने के लिए बड़े स्ट्रक्चरल सुधार जरूरी हैं। फिलहाल भारतीय फर्मों के स्केल पर कुछ पुरानी कानूनी पाबंदियां हैं। चर्चा है कि सरकार 'मल्टीडिसिप्लिनरी पार्टनरशिप' मॉडल ला सकती है, जिससे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकील और एक्चुअरीज एक साथ काम कर सकें। इसके अलावा, सरकारी प्रोक्योरमेंट नियमों में बदलाव भी जरूरी है, क्योंकि वर्तमान नियम अक्सर विदेशी कंपनियों को वरीयता देते हैं, जिससे घरेलू स्टार्टअप्स के लिए एंट्री बैरियर खड़े हो जाते हैं।
राह में जोखिम और चुनौतियां
ग्लोबल दिग्गजों के पास दशकों पुराना नेटवर्क, ब्रांड वैल्यू और संसाधन हैं, जिनका मुकाबला करना रातों-रात संभव नहीं है। साथ ही, प्रोफेशनल सर्विसेज के क्षेत्र में रेगुलेटरी सुधारों की गति अक्सर धीमी रही है। यदि सरकार विज्ञापन से जुड़ी पाबंदियों और पार्टनरशिप मॉडल्स को तुरंत आसान नहीं बनाती, तो घरेलू कंपनियों के लिए बड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स जीतना एक लंबी लड़ाई हो सकती है।
निवेशकों के लिए आने वाले समय में सरकारी प्रोक्योरमेंट रिफॉर्म्स और मल्टीडिसिप्लिनरी फर्मों से जुड़े पॉलिसी अपडेट्स पर नजर रखना जरूरी है। यही संकेत देंगे कि यह विजन हकीकत में कितनी तेजी से बदल रहा है।
