प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की इकॉनमी को मजबूती देने के लिए लोगों से विदेशी सैर और डेस्टिनेशन वेडिंग्स को छोड़कर स्वदेशी को अपनाने की अपील की है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत की GDP ग्रोथ उम्मीदों से बेहतर **7.8%** दर्ज की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान देशवासियों से विदेशी यात्राओं और विदेशों में शादियाँ करने से बचने का आह्वान किया है। सरकार का मानना है कि विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो को कम करना और घरेलू खपत को बढ़ाना देश की आर्थिक गति को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।\n\n### इकोनॉमी की शानदार रफ्तार\nयह अपील ऐसे समय में आई है जब भारत के आर्थिक आंकड़े मजबूती की गवाही दे रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 7% के अनुमान को भी पीछे छोड़ दिया है। यह ग्रोथ ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भारतीय बाजार के लचीलेपन (Resilience) को दर्शाती है।\n\n### सेक्टर पर क्या होगा असर?\nसरकार का यह 'वोकल फॉर लोकल' मंत्र कंजम्पशन-ड्रिवेन सेक्टर के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। यदि लोग विदेशी ट्रिप्स कम करेंगे, तो इसका सीधा फायदा डोमेस्टिक हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर और लग्जरी रिटेल को मिल सकता है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल और आउटबाउंड लीजर सर्विसेज से जुड़ी कंपनियों को डिमांड में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।\n\n### किन जोखिमों पर रखें नजर?\nआंकड़े भले ही मजबूत हों, लेकिन कुछ चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं। वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और 'एल नीनो' (El Niño) के चलते मॉनसून की अनिश्चितता, रूरल डिमांड के लिए रिस्क बनी हुई है। निवेशकों की नजर अब आगामी तिमाही के कंज्यूमर स्पेंडिंग डेटा पर है, जो तय करेगा कि यह स्वदेशी अभियान वास्तव में घरेलू बैलेंस शीट को कितनी मजबूती देता है।
