Prime Minister Internship Scheme के जरिए अब IT कंपनियां AI के लिए तैयार टैलेंट पूल तैयार कर रही हैं। यह पहल न केवल फ्रेशर्स की ट्रेनिंग में लगने वाले भारी खर्च को कम करने में मदद करेगी, बल्कि कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को भी बढ़ाएगी।
कैंपस से कॉरपोरेट तक का सफर
साल 2024 के अंत में शुरू हुई Prime Minister Internship Scheme अब बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए ह्यूमन कैपिटल मैनेजमेंट का एक अहम हिस्सा बन गई है। भारत जिस तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दम पर आर्थिक रफ्तार पकड़ रहा है, उसके लिए एक कुशल वर्कफोर्स की सख्त जरूरत है। कंपनियां अब इंटर्नशिप के जरिए छात्रों को कैंपस से कॉरपोरेट लाइफ के लिए तैयार करने की एक स्टैंडर्ड प्रक्रिया बना रही हैं।
ट्रेनिंग खर्च में कटौती की रणनीति
IT सेक्टर में इस समय स्पेशलाइज्ड AI स्किल्स के लिए भारी प्रतिस्पर्धा है, जिससे हायरिंग कॉस्ट बढ़ रही है। आमतौर पर बड़ी कंपनियां फ्रेश इंजीनियर्स को काम पर रखने के बाद उन्हें महीनों तक ट्रेनिंग देती हैं, जिस पर बहुत खर्च आता है। अगर इंटर्नशिप के जरिए उन्हें पहले ही प्रोफेशनल और टेक्निकल फाउंडेशन मिल जाए, तो कंपनियों का Return on Investment (ROI) तेजी से बढ़ेगा और ट्रेनिंग की लागत में कमी आएगी।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
हालांकि, इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर स्केल करने में कई चुनौतियां हैं। क्या अलग-अलग इंडस्ट्रीज में ट्रेनिंग की क्वालिटी एक जैसी रह पाएगी? इसके अलावा, एडवांस AI रोल्स के लिए गहरी रिसर्च और कोडिंग स्किल्स की जरूरत होती है, जिसके लिए सिर्फ बेसिक इंटर्नशिप पर्याप्त नहीं हो सकती। साथ ही, यह स्कीम मुख्य रूप से CSR फंड के जरिए चल रही है, जिसके मैनेजमेंट पर काफी प्रशासनिक मेहनत की जरूरत है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
IT सेक्टर इस समय वेज इन्फ्लेशन (Wage Inflation) और टैलेंट रिटेंशन के दबाव से जूझ रहा है। TCS, Infosys, और Wipro जैसी कंपनियां अपनी AI क्षमताओं को बढ़ाने में जुटी हैं। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि कंपनियां इंटर्न को कितने प्रतिशत फुल-टाइम रोल्स में बदल पा रही हैं और क्या इससे उनके मुनाफे पर कोई सकारात्मक असर पड़ रहा है।
