PHDCCI Chief Tax Reform: FPI की भारी निकासी को रोकने के लिए टैक्स में बदलाव की मांग

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
PHDCCI Chief Tax Reform: FPI की भारी निकासी को रोकने के लिए टैक्स में बदलाव की मांग

PHDCCI के प्रेसिडेंट अनिल गुप्ता ने बाजार में विदेशी निवेशकों (FPIs) की भारी बिकवाली को देखते हुए कैपिटल गेन्स और ट्रांजैक्शन टैक्स की समीक्षा की मांग की है। 2026 में अब तक FPIs ने बाजार से करीब **₹3 लाख करोड़** निकाल लिए हैं।

टैक्स में बदलाव की दरकार

PHD Chamber of Commerce and Industry (PHDCCI) के प्रेसिडेंट अनिल गुप्ता ने केंद्र सरकार से मार्केट को स्टेबल बनाने के लिए इन्वेस्टर-फ्रेंडली टैक्स रिफॉर्म्स की अपील की है। चैंबर की मांग है कि लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के साथ-साथ सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को भी तर्कसंगत बनाया जाए, ताकि निवेशकों के हाथ में आने वाला रिटर्न बेहतर हो सके।

क्यों छोड़ रहे हैं विदेशी निवेशक?

साल 2026 का आंकड़ा डराने वाला है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से अब तक ₹2.95 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी कर ली है। सिर्फ अक्टूबर के महीने में ही FPIs ने ₹34,843 करोड़ के शेयर बेचे। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5.5% से 6% के बीच बने रहना है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अमेरिका में निवेश करना उभरते बाजारों के मुकाबले सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाला विकल्प बन गया है।

स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स का रोडमैप

KEI Industries के CMD अनिल गुप्ता ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पाने के लिए राज्य सरकारों से भी सहयोग मांगा है। उनका कहना है कि जमीन अधिग्रहण, लेबर मोबिलिटी और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रोजेक्ट की लागत कम होगी। साथ ही, लॉजिस्टिक्स में सुधार और इनलैंड कंटेनर डिपो के विस्तार से इनपुट कॉस्ट को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।

निवेशकों के लिए टेक-अवे

हालांकि घरेलू निवेशकों (DIIs) ने विदेशी बिकवाली के झटकों को काफी हद तक संभाला है, लेकिन FPI फ्लो की अस्थिरता अभी भी चिंता का विषय है। आने वाले बजट सीजन में सरकार टैक्स और स्ट्रक्चरल सुधारों पर क्या रुख अपनाती है, इस पर निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.