Elon Musk पर बरसे असदुद्दीन ओवैसी: भारत की रेगुलेटरी स्वायत्तता पर खड़े किए सवाल

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AuthorNeha Patil|Published at:
Elon Musk पर बरसे असदुद्दीन ओवैसी: भारत की रेगुलेटरी स्वायत्तता पर खड़े किए सवाल

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने स्टारलिंक की एंट्री को लेकर एलन मस्क द्वारा भारत की रेगुलेटरी स्वायत्तता पर उठाए गए सवालों का कड़ा विरोध किया है। यह राजनीतिक घमासान सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेक्टर में बढ़ते कंपटीशन के बीच हो रहा है, जहां रिलायंस जियो और यूटेलसैट वनवेब जैसे दिग्गज भी रेस में हैं।

असदुद्दीन ओवैसी ने एलन मस्क के उस बयान की कड़ी आलोचना की है, जिसमें मस्क ने भारत के रेगुलेटरी माहौल को घरेलू कॉर्पोरेट हितों से प्रभावित बताया था। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेक्टर में हलचल तेज है और निवेशक स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के सरकार के फैसले पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार में हाई-स्टेक्स कंपटीशन

भारत में स्टारलिंक की संभावित एंट्री केवल एक टेक्नोलॉजी इवेंट नहीं है, बल्कि यह रिलायंस जियो और यूटेलसैट वनवेब जैसी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। रिलायंस ग्रुप और भारती एंटरप्राइजेज समर्थित ये कंपनियां फिलहाल अपने ऑपरेटिंग लाइसेंस हासिल करने के लिए जटिल रेगुलेटरी प्रोसेस से गुजर रही हैं। स्टारलिंक की एंट्री भविष्य में प्राइसिंग और मार्केट शेयर के गणित को बदल सकती है, जिससे सेक्टर की कॉम्पिटिटिव इंटेंसिटी बढ़ने की उम्मीद है।

स्पेक्ट्रम आवंटन पर निवेशकों की नजर

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से आवंटित करेगी या नीलामी (Auction) के जरिए। यह फैसला कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर और एंट्री कॉस्ट को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। मस्क की टिप्पणियों ने इस नीतिगत फैसले को राजनीतिक रंग दे दिया है। हालांकि, टेलीकॉम शेयरधारकों के लिए राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा महत्वपूर्ण लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क की स्पष्टता और गति है। सेक्टर के आने वाले दिनों में प्रदर्शन का आधार सुरक्षा क्लीयरेंस और स्पेक्ट्रम उपयोग की शर्तें ही तय करेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.