रिटेल मार्केट में प्याज की कीमतें अभी भी **₹70 प्रति किलो** के आसपास बनी हुई हैं। हालांकि सरकार **₹35 प्रति किलो** के भाव पर बफर स्टॉक से प्याज जारी कर रही है, लेकिन सप्लाई चेन की दिक्कतों और नई खरीफ फसल में देरी के चलते महंगाई काबू में नहीं आ रही है।
बाजार में जारी है महंगाई का असर
प्याज की कीमतों में नरमी न आना आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है। सरकारी दखल के बावजूद रिटेल भाव ₹70 प्रति किलो पर बने हुए हैं। सरकार बफर स्टॉक से ₹35 प्रति किलो पर प्याज बेच रही है, लेकिन बाजार की हकीकत इससे काफी अलग है। यह गैप साफ दिखाता है कि फूड इन्फ्लेशन को कंट्रोल करने में सप्लाई-चेन की चुनौतियां कितनी बड़ी हैं।
क्यों नहीं घट रहे दाम?
कीमतों में इस उछाल के पीछे रबी से खरीफ सीजन का ट्रांजिशन है। रबी सीजन का पुराना स्टॉक खत्म हो रहा है, जबकि खराब मौसम और नासिक व कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बुआई में देरी के कारण नई खरीफ फसल आने में समय लग रहा है। जब तक मंडियों में नई फसल की आवक जोर नहीं पकड़ती, स्थानीय स्तर पर किल्लत बनी रहेगी।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
सप्लाई की कमी को देखते हुए सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्रोक्योरमेंट प्राइस बढ़ाकर ₹2,125 प्रति क्विंटल कर दिया है। इसका मकसद प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मजबूत करना और किसानों को प्राइवेट चैनलों की जगह सरकारी तंत्र को सप्लाई करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
आगे क्या होगा?
लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें और प्राइवेट प्लेयर्स द्वारा की जा रही जमाखोरी भी कीमतों को नीचे आने से रोक रही है। कंज्यूमर खर्चों में खाने-पीने की चीजों का बड़ा हिस्सा होता है, ऐसे में प्याज की ऊंची कीमतें FMCG सेक्टर की डिमांड पर भी बुरा असर डाल सकती हैं। अब निवेशकों और मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मंडियों में नई खरीफ फसल की आवक कितनी तेजी से बढ़ती है, क्योंकि यही कीमतों को ठंडा करने का एकमात्र रास्ता है।
