Om Birla का बड़ा फरमान: सरकारी खर्चों में अब चलेगा AI का जोर, जवाबदेही तय करने का नया मंत्र

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Om Birla का बड़ा फरमान: सरकारी खर्चों में अब चलेगा AI का जोर, जवाबदेही तय करने का नया मंत्र

लोकसभा स्पीकर Om Birla ने Public Accounts Committees (PAC) को निर्देश दिए हैं कि वे अब केवल ऑडिट अनुपालन तक सीमित न रहें। तिरुवनंतपुरम में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने सरकारी खर्चों की निगरानी के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल पर जोर दिया है, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सके और आम जनता के पैसे का सही इस्तेमाल हो।

लोकसभा स्पीकर Om Birla ने सरकारी खर्चों की निगरानी के तौर-तरीकों में एक बड़े बदलाव की वकालत की है। 3 नवंबर, 2026 को तिरुवनंतपुरम में आयोजित PAC चेयरपर्सन के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने साफ कहा कि वित्तीय जवाबदेही का मतलब सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि खर्चों का वास्तविक असर दिखना चाहिए।

सिर्फ 'Compliance' नहीं, 'Outcome' पर ध्यान

स्पीकर का नया निर्देश 'आउटकम-बेस्ड परफॉरमेंस ट्रैकिंग' की ओर एक बड़ा कदम है। अब तक समितियां सिर्फ यह देखती थीं कि खर्च नियमों के मुताबिक हुआ या नहीं, लेकिन अब इस पर फोकस होगा कि उस खर्च का जमीन पर क्या असर पड़ा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सपेयर्स के पैसे से बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार हो, न कि केवल बही-खातों में एंट्री पूरी हो।

टेक्नोलॉजी का बढ़ेगा दखल

इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए Om Birla ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स को अपनाने का आह्वान किया है। डेटा-ड्रिवन टूल्स के जरिए समितियां यह ट्रैक कर पाएंगी कि सरकारी पैसा कहां, कैसे और क्यों खर्च हो रहा है। इससे प्रोजेक्ट्स में देरी, वित्तीय बर्बादी और लीकेज को रोकने में मदद मिलेगी। मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए यह सुधार गुड गवर्नेंस और प्रोजेक्ट्स के सही निष्पादन की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

राजनीति से ऊपर उठकर काम

स्पीकर ने इस बात पर जोर दिया कि ऑडिट निष्कर्षों की समीक्षा करते समय संसदीय और राज्य विधानसभा समितियों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठना चाहिए। उनका उद्देश्य ऑडिट को राजनीति के बजाय सिस्टम में सुधार का जरिया बनाना है।

आगे का रास्ता

'ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन' थीम पर आयोजित इस सम्मेलन का अगला चरण राज्यों द्वारा इन निर्देशों को लागू करना है। इन्वेस्टर और आम नागरिक अब इस पर नजर रखेंगे कि कितनी तेजी से राज्य सरकारें AI-आधारित मॉनिटरिंग को अपनाती हैं, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकारी प्रोजेक्ट्स की लागत में होने वाली ओवररनिंग (cost overruns) को कम किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.