सऊदी अरब की मुख्य पाइपलाइन बंद होने के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल **$108** प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। इस भू-राजनीतिक तनाव और टेक सेक्टर में बिकवाली के कारण ग्लोबल मार्केट में भारी गिरावट देखी जा रही है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
तेल संकट और सप्लाई चेन पर असर
14 सितंबर 2026 को ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट पर दबाव साफ दिखा। सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमलों के बाद इसे बंद करना पड़ा, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स उछलकर $108 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई का दबाव अर्थव्यवस्था पर बढ़ेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में राजनयिक कोशिशें नाकाम रहने से समुद्री व्यापारिक मार्गों में व्यवधान का खतरा और बढ़ गया है, जिससे एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बनी हुई है।
टेक सेक्टर में भी गिरावट
सिर्फ एनर्जी ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी भारी बिकवाली देखी गई है। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 3% से ज्यादा लुढ़क गया है। इसका कारण सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix) जैसे बड़े सेमीकंडक्टर शेयरों में तेज गिरावट है। इंडस्ट्री लीडर्स ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास की गति को कम करने का संकेत दिया है, जिससे निवेशकों ने टेक पोर्टफोलियो से पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
सेंट्रल बैंकों का रुख अहम
निवेशकों की नजरें अब दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों पर टिकी हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve), बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) और बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) जल्द ही ब्याज दरों पर अपने फैसले सुनाने वाले हैं। बाजार अब यह देख रहा है कि क्या ये बैंक इकोनॉमिक ग्रोथ को प्राथमिकता देंगे या फिर बढ़ती एनर्जी कीमतों से उपजी महंगाई को काबू करने के लिए कड़े कदम उठाएंगे।
