OfBusiness के आशीष मोहपात्रा और Optum Global के सुरिंदर सिंह ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा किया है। दोनों एक्सपर्ट्स का मानना है कि फाउंडर्स को शुरुआती इक्विटी के बजाय ऑपरेशनल कैश फ्लो को प्राथमिकता देनी चाहिए।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में फंडिंग का मिजाज बदल रहा है। OfBusiness के को-फाउंडर आशीष मोहपात्रा का मानना है कि उद्यमियों को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है। उनके अनुसार, भारत में डेट लिक्विडिटी (Debt Liquidity) इक्विटी की तुलना में 20 से 22 गुना ज्यादा उपलब्ध है, जो बिजनेस को स्केल करने का एक अधिक टिकाऊ तरीका है।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी को प्राथमिकता
ज्यादातर फाउंडर्स का लक्ष्य वेंचर कैपिटल जुटाना होता है, लेकिन मोहपात्रा का तर्क है कि कंपनियों को कस्टमर एडवांस और सप्लायर क्रेडिट का उपयोग करना चाहिए। यह अप्रोच कंपनी को खुद के पैसे पर निर्भर बनाती है, जिससे बार-बार शेयर डाइल्यूशन (Dilution) की जरूरत नहीं पड़ती और बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान कंपनी अधिक स्टेबल रहती है।
MSMEs में डिजिटल गैप
Optum Global के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सुरिंदर सिंह ने उन करोड़ों MSMEs की ओर ध्यान खींचा है जो अभी भी बुनियादी डिजिटल टूल्स से वंचित हैं। सिंह का कहना है कि डिजिटल इन्वेस्टमेंट को केवल बड़ी फैक्ट्रियों तक सीमित न रखकर छोटे उद्योगों को लॉजिस्टिक्स इंटेलिजेंस और डिमांड फोरकास्टिंग जैसे टूल्स देने पर खर्च करना चाहिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और AI पर बहस
निवेश को लेकर दोनों दिग्गजों की राय अलग है। मोहपात्रा भारी मैन्युफैक्चरिंग, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और थर्मल पावर जैसी बुनियादी चीजों पर जोर देते हैं और AI के रिटर्न को लेकर फिलहाल सतर्क हैं। वहीं, सुरिंदर सिंह का मानना है कि AI एक फंडामेंटल एजेंडा है, लेकिन भारतीय बिजनेस को इसे अपनाने के लिए पहले डेटा गवर्नेंस और रिस्क फ्रेमवर्क को दुरुस्त करना होगा।
बदलती हुई GCCs की भूमिका
भारत में अभी लगभग 2,500 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) काम कर रहे हैं। ये केंद्र अब केवल बैक ऑफिस नहीं रह गए हैं, बल्कि ग्लोबल इनोवेशन चेन का हिस्सा बन रहे हैं। यह बदलाव आईटी और सर्विसेज सेक्टर के लिए ऊंचे मार्जिन और नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।
