ओडिशा सरकार ने 'सुभद्रा योजना' के तहत **1.03 करोड़** से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में **₹5,160 करोड़** की राशि ट्रांसफर की है। प्रत्येक पात्र लाभार्थी को **₹5,000** की सहायता मिली है, जो राज्य में ग्रामीण खपत और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मददगार साबित हो सकती है।
वितरण का गणित
ओडिशा सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए राज्य की 1.03 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में ₹5,160 करोड़ की राशि पहुंचाई है। इस नई किस्त में 2.21 लाख नई लाभार्थी महिलाएं भी शामिल हुई हैं, जिससे योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
क्या है योजना का स्ट्रक्चर?
सितंबर 2024 में लॉन्च की गई 'सुभद्रा योजना' के तहत, पात्र महिलाओं को सालाना ₹10,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि ₹5,000 की दो किस्तों में बांटी जाती है, जो आमतौर पर रक्षा बंधन और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जैसे खास मौकों पर जारी की जाती है। इस तरह 5 साल की अवधि में हर लाभार्थी को कुल ₹50,000 मिलेंगे।
इकोनॉमिक इंपैक्ट और बाजार की नजर
हालांकि यह एक सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रम है, लेकिन बाजार के जानकारों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है। ग्रामीण इलाकों में इस तरह के भारी कैश फ्लो से परिवारों के पास खर्च करने योग्य आय (Liquidity) बढ़ती है। इसका सीधा असर एफएमसीजी (FMCG) और कंज्यूमर गुड्स कंपनियों की डिमांड पर पड़ सकता है।
डिजिटलीकरण पर जोर
वित्तीय सहायता के साथ-साथ सरकार रूरल प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए ढांचागत सुधारों पर भी काम कर रही है। डाक विभाग (Department of Posts) के साथ मिलकर सरकार डिजिटल सेवाओं को स्थानीय स्तर पर जोड़ रही है, जिसमें CM-Kisan, AgriStack और आधार सीडिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन सुधारों का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सक्षम और पारदर्शी बनाना है।
