ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 को रद्द करने की मांग की है। राज्य सरकार का दावा है कि इस बदलाव से उसे सालाना **₹12,000 करोड़** से अधिक का राजस्व नुकसान होगा, जिससे माइनिंग सेक्टर में बड़ी अनिश्चितता पैदा हो गई है।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के दिग्गज नेता नवीन पटनायक ने राज्य के BJP सांसदों को एक पत्र लिखकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 को वापस लेने की पुरजोर मांग की है। यह कानून 13 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पारित हुआ था और अब यह केंद्र और राज्य के बीच टैक्स लगाने के अधिकार को लेकर एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है।
राज्य की चिंता और रेवेन्यू पर असर
पटनायक का कहना है कि यह नया कानून राज्य की राजकोषीय स्वायत्तता (Fiscal Autonomy) पर प्रहार है। इसके तहत राज्य अब खनिज संपदा और जमीन पर स्वतंत्र रूप से टैक्स, सेस (Cess) या फीस नहीं लगा पाएगा। राज्य का अनुमान है कि इससे उन्हें हर साल ₹12,000 करोड़ से ज्यादा का सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है खतरा?
निवेशकों की नजर से देखें तो यह एक 'रेगुलेटरी रिस्क' की तरह है। केंद्र का तर्क है कि यह बदलाव देशभर में टैक्स में एकरूपता लाने के लिए जरूरी है, लेकिन राज्य और केंद्र के बीच इस खींचतान से माइनिंग कंपनियों के लिए कामकाज करना कठिन हो सकता है। यदि ओडिशा सरकार इस कानून को चुनौती देती है, तो अदालती विवादों के चलते टैक्स लाइबिलिटीज को लेकर उलझन बढ़ सकती है।
आगे क्या होगा?
माइनिंग कंपनियों के लिए आने वाली तिमाहियों में उनकी लागत और अनुपालन (Compliance) रणनीतियों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि ओडिशा सरकार कानूनी रास्ता अपनाती है या केंद्र के साथ बातचीत का कोई माध्यम ढूंढती है। खनन क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए यह नीतिगत अनिश्चितता उनके शेयरों पर दबाव बना सकती है।
