इंडिया केम 2026 समिट में ओडिशा ने निवेशकों को लुभाने में कामयाबी हासिल की है। राज्य को कुल **₹53,893 करोड़** के निवेश का भरोसा मिला है, जिसमें NLC India और Larsen & Toubro जैसे बड़े खिलाड़ियों ने बड़ी हिस्सेदारी दिखाई है।
ओडिशा अब अपनी पहचान केवल मेटल और माइनिंग हब तक सीमित नहीं रखना चाहता। मुंबई में आयोजित 'इंडिया केम 2026' समिट के दौरान राज्य सरकार ने ₹53,893.51 करोड़ के निवेश के लिए 9 MoU और 4 लेटर्स ऑफ इंटेंट पर मुहर लगाई है। इसका मकसद कच्चे माल पर निर्भरता कम कर केमिकल और पेट्रोकेमिकल मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पैठ मजबूत करना है।
प्रमुख निवेश और खिलाड़ियों की भूमिका
इस निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा NLC India Limited की ओर से आया है, जिसने पावर और केमिकल सेक्टर में ₹36,763.51 करोड़ निवेश करने का वादा किया है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro ने भी ₹8,100 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। ये बड़े निवेश राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और केमिकल सप्लाई चेन को एक नई रफ्तार देंगे।
क्यों बदल रही है ओडिशा की रणनीति?
ओडिशा अब तक मुख्य रूप से JSW जैसी कंपनियों के जरिए स्टील और माइनिंग के लिए जाना जाता था। अब राज्य सरकार POSCO India और JSW जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर रही है, जो एक्सपोर्ट क्षमता को बढ़ा सके। इस बदलाव से राज्य में 20,000 से ज्यादा रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
ये आंकड़े अभी निवेश प्रस्ताव (MoUs) के रूप में हैं। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इन परियोजनाओं का असली लाभ तब दिखेगा जब ये जमीन पर उतरेंगी। फिलहाल, जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition), रेगुलेटरी मंजूरी और कंपनियों का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) ही वो मुख्य बातें हैं, जिन पर आने वाले समय में नजर रखनी चाहिए।
