सरकार ने देश के **1.4 करोड़** किराना स्टोर्स को डिजिटल बनाने के लिए 'DigiDukaan' पहल की शुरुआत की है। ONDC और DPIIT के इस कदम से FMCG कंपनियों की सप्लाई चेन और छोटे दुकानदारों की प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया पूरी तरह बदल सकती है।
भारत के विशाल रिटेल सेक्टर को आधुनिक बनाने की दिशा में DPIIT और ONDC ने 'DigiDukaan' नाम का एक बड़ा मिशन शुरू किया है। इस पहल का लक्ष्य देश के करीब 1.4 करोड़ किराना स्टोर्स को डिजिटल प्रोक्योरमेंट से जोड़ना है। अब तक पेन-पेपर पर चलने वाला यह सिस्टम सीधे FMCG कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़ जाएगा, जिससे सप्लाई चेन में पारदर्शिता आएगी।
FMCG डिस्ट्रीब्यूशन पर असर
इस डिजिटल बदलाव से FMCG कंपनियों को रियल-टाइम डेटा मिलेगा। इससे उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि किस एरिया में किस प्रोडक्ट की मांग ज्यादा है और स्टॉक लेवल क्या है। Hindustan Unilever, Marico, ITC और Tata Consumer Products जैसी दिग्गज कंपनियां पहले ही इस नेटवर्क से जुड़ रही हैं। इनका मुख्य मकसद डिस्ट्रीब्यूशन को एफिशिएंट बनाना है, ताकि ट्रेड स्कीम्स और नई लॉन्चिंग सीधे रिटेलर्स तक पहुँच सके। हालांकि, असल सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये डिजिटल सॉल्यूशंस मौजूदा Distributor Management Systems (DMS) के साथ कितनी अच्छी तरह काम करते हैं।
चुनौतियां और ग्राउंड रियलिटी
टेक्नोलॉजी के इस दौर में सबसे बड़ी चुनौती पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूटर्स का विरोध है, क्योंकि वे फाइनेंसिंग और लास्ट-माइल डिलीवरी में अहम भूमिका निभाते हैं। ONDC की कोशिश है कि वह इन डिस्ट्रीब्यूटर्स को दरकिनार करने के बजाय उन्हें सिस्टम में शामिल करे। इसके अलावा, 21,000 रिटेलर्स पहले ही इस प्लेटफॉर्म पर आ चुके हैं, लेकिन इसे करोड़ों दुकानों तक पहुँचाने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी और दुकानदारों को प्रशिक्षित करने की बड़ी जरूरत है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब FMCG कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए। देखना यह होगा कि इस डिजिटल बदलाव से उनकी कॉस्ट पर क्या असर पड़ता है और ट्रेड मार्जिन में क्या बदलाव आता है। आने वाली तिमाहियों में रिटेलर्स के जुड़ने की रफ्तार और डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट में कमी, इस सेक्टर के लिए प्रमुख 'मॉनिटरबल्स' होंगे।
