मानसून की भारी बारिश ने उत्तर भारत में तबाही मचा दी है। बिहार के **11** जिलों में गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है, जिससे **10 लाख** से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। वहीं, दिल्ली में खराब मौसम के चलते लॉजिस्टिक्स और फ्लाइट्स पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई चेन और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
उत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश ने 5 सितंबर, 2026 तक एक बड़े मानवीय और ऑपरेशनल संकट को जन्म दे दिया है। बिहार की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है; पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.53 मीटर तक पहुंच गया है, जिसने पिछले 50.52 मीटर के उच्चतम जलस्तर (HFL) के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भोजपुर और वैशाली सहित 11 जिलों में 10.26 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं। कोसी, गंडक और बूढ़ी गंडक जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे खरीफ फसलों को भारी नुकसान की आशंका है।
उत्तर भारत में लॉजिस्टिक्स का परिदृश्य भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दिल्ली में जलभराव के कारण नेशनल हाईवे-48 (NH-48) पर यातायात ठप हो गया है, जिसका असर माल ढुलाई पर पड़ रहा है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स में देरी को लेकर एडवाइजरी जारी की है। अगर यह देरी लंबी खिंची, तो लॉजिस्टिक्स कंपनियों की लागत में बढ़ोतरी तय है।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो, यह जलवायु आपदा सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। 2026 में 'बिलो-नॉर्मल' मानसून और अब बाढ़ की दोहरी मार से फसलों की पैदावार कम हो सकती है, जिससे अनाज और सब्जियों की कीमतों में उछाल आ सकता है। यह शॉर्ट-टर्म में फूड इंफ्लेशन को और ऊपर ले जा सकता है।
आने वाले समय में बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए सरकार का खर्च बढ़ना तय है। हालांकि इससे कंस्ट्रक्शन सेक्टर को वॉल्यूम मिल सकता है, लेकिन क्षेत्रीय खपत पर दबाव रहेगा। निवेशकों को सलाह है कि वे फसल नुकसान के आधिकारिक आकलन, फूड प्राइस ट्रेंड और सरकारी राहत कोष से जुड़ी खबरों पर नजर रखें, क्योंकि ये फैक्टर्स सीधे तौर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकिल को प्रभावित करेंगे।
