साल 2026 में MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स ग्लोबल स्तर पर लीड कर रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह TSMC और Samsung जैसी सेमीकंडक्टर दिग्गज कंपनियां हैं, जबकि भारतीय बाजार में विदेशी निवेश की भारी निकासी ने दबाव बना रखा है।
साल 2026 में ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट्स में एक बड़ा परफॉर्मेंस गैप देखने को मिल रहा है। नॉर्थ एशिया की टेक और सेमीकंडक्टर कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हार्डवेयर की जबरदस्त मांग के चलते MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स को S&P 500 से भी आगे ले गई हैं। इस रैली में TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियां इंजन का काम कर रही हैं, जिनकी लॉजिक चिप्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की डिमांड आसमान छू रही है।\n\nग्लोबल इंस्टीट्यूशनल फंड्स फिलहाल अपना पूरा पैसा इन सेमीकंडक्टर पावरहाउस में लगा रहे हैं, जो दुनिया भर में बन रहे डेटा सेंटर्स के लिए बेहद जरूरी हैं।\n\n### भारतीय बाजार में क्यों है सुस्ती?\n\nइसके उलट, भारतीय शेयर बाजार इस तेजी की दौड़ में पिछड़ता दिख रहा है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने ₹2.40 लाख करोड़ से ज्यादा की पूंजी भारतीय बाजार से निकाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:\n\n* हाई वैल्युएशन: साल 2024 और 2025 में भारतीय बाजारों का वैल्युएशन प्रीमियम काफी ऊंचे स्तर पर था।\n* सेक्टर का अभाव: भारतीय बाजार में AI सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का कोई सीधा एक्सपोजर नहीं है, जो फिलहाल ग्लोबल लिक्विडिटी का मुख्य केंद्र है।\n* मैक्रोइकॉनॉमिक हेडविंड्स: रुपये में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ट्रेड डेफिसिट पर असर पड़ा है, जिससे Nifty 50 के प्रति विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है।\n\nभविष्य की बात करें तो नॉर्थ एशिया की यह रैली कुछ ही कंपनियों पर निर्भर है, जो 'कंसंट्रेशन रिस्क' पैदा करती है। वहीं भारतीय बाजार के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मौजूदा करेक्शन के बाद विदेशी निवेशक फिर से वापसी करेंगे या भारतीय अर्थव्यवस्था खुद को स्थिर करके दोबारा ग्लोबल फ्लो का पसंदीदा ठिकाना बन पाएगी।
