बाजार जहां RBI से **125 bps** की बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, वहीं ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Nomura ने एक अलग राय पेश की है। Nomura के मुताबिक, महंगाई के दबाव को देखते हुए RBI सिर्फ **50 bps** तक ही रेपो रेट बढ़ाएगा।
देश के वित्तीय गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी करेगा? लेकिन ब्रोकरेज फर्म Nomura की रिपोर्ट ने बाजार के अनुमानों को एक नया मोड़ दिया है। जहां मार्केट एक्सपर्ट्स 125 bps (यानी 1.25%) तक की बढ़ोतरी मानकर चल रहे हैं, वहीं Nomura का कहना है कि RBI एक संतुलित और सतर्क रुख अपनाएगा और रेपो रेट में कुल 50 bps (यानी 0.50%) की ही बढ़ोतरी करेगा। इस प्रोजेक्शन में अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 bps की दो किश्तें शामिल हैं, जिससे टर्मिनल रेपो रेट 5.75% पर पहुंच सकता है।
क्यों कम रहेगी दरों में बढ़ोतरी?
Nomura के विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक स्थिति में बहुत ज्यादा टाइट मॉनेटरी पॉलिसी की जरूरत नहीं है। हालांकि महंगाई और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर है, लेकिन यह दबाव हर सेक्टर में नहीं दिख रहा है। ब्रोकरेज के अनुसार, आने वाले समय में महंगाई दर को 4% के लक्ष्य तक लाने के लिए RBI बहुत कठोर होने के बजाय बाजार की मांग में आने वाली स्वाभाविक कमी (Natural cooling) पर भरोसा कर सकता है।
रुपया और बाहरी चुनौतियां
घरेलू ब्याज दरों के मोर्चे पर राहत के संकेत भले हों, लेकिन भारतीय रुपये पर दबाव बरकरार है। विदेशी ब्रोकरेज ने साफ किया है कि ऊर्जा आयात की ऊंची लागत, यूएस फेडरल रिजर्व की पॉलिसी और अमेरिका की बढ़ती ट्रेजरी यील्ड (US Treasury yields) भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बनी हुई है। इसके अलावा, भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट और RBI की विदेशी मुद्रा भंडार (US Dollar Reserves) बढ़ाने की रणनीति भी रुपये को अन्य प्रमुख मुद्राओं जैसे कि यूरो के मुकाबले संघर्ष करवा रही है।
अब निवेशकों की नजरें पूरी तरह से RBI की अगली पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सेंट्रल बैंक अपनी घरेलू ग्रोथ और रुपये की सेहत के बीच किस तरह का संतुलन बनाता है।
