Nomura की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी फाइनेंशियल ईयर 2027 की शुरुआत में **7%** से ज्यादा की ग्रोथ दिखा सकती है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म ने AI से लेबर मार्केट में बदलाव और BOP (भुगतान संतुलन) के जोखिमों जैसी चुनौतियों की चेतावनी दी है, और नौकरी की मांग में बड़े बदलाव की आशंका जताई है।
भारत की इकोनॉमी में दिखेगी मजबूती
आंकड़े बताते हैं कि भारत की इकोनॉमी में मजबूती बनी रहेगी। अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) 7% के आंकड़े को पार कर जाएगा। बाजार का भरोसा जहां इकोनॉमी की ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव है, वहीं Nomura के एनालिस्ट्स का फुल फाइनेंशियल ईयर का अनुमान थोड़ा सतर्क है, जो 6.6% रहने की उम्मीद है। यह अनुमान ग्लोबल headwinds और डोमेस्टिक स्ट्रक्चरल बदलावों को ध्यान में रखकर लगाया गया है।
AI का नौकरियों पर असर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल इकोनॉमी के लिए एक बड़ा फैक्टर है। Nomura की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत AI के नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखने के लिए एक प्रमुख जगह है। हालांकि, कुल मिलाकर नौकरियों पर इसका असर पॉजिटिव रहने की उम्मीद है, पर यह एक टू-टियर लेबर मार्केट तैयार कर रहा है। 2022 से अगस्त 2026 के बीच हुए रिसर्च में 83,100 AI-related हायरिंग हुई हैं, जबकि 31,921 नौकरियां छंटनी और नौकरी छोड़ने की वजह से खत्म हुई हैं। इकोनॉमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हायरिंग मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी सेक्टर में केंद्रित है, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज में ज्यादा नौकरियां गई हैं। एंट्री-लेवल वर्कर्स की मांग में स्पष्ट कमी देखी जा रही है, जो वर्कफोर्स री-स्किलिंग और टैलेंट मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती है।
महंगाई और BOP पर खास नजर
महंगाई (Inflation) और भुगतान संतुलन (Balance of Payments - BOP) भी ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की उम्मीद है, और अनुमान है कि एडिबल ऑयल्स, पल्सेस और सब्जियों जैसी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई 8% तक पहुंच सकती है। वहीं, भुगतान संतुलन एक जटिल मुद्दा बना हुआ है। हालांकि, कमर्शियल बैंक फॉरेन करेंसी अकाउंट्स और कॉर्पोरेट बॉरोइंग के जरिए $80 बिलियन से $90 बिलियन तक के टोटल इनफ्लो की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन इन फंड्स की सस्टेनेबिलिटी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। खास तौर पर, AI-ड्रिवन पोर्टफोलियो आउटफ्लो वित्तीय स्थिरता के लिए एक चुनौती पेश कर सकते हैं, अगर इन्हें ठीक से मैनेज न किया गया तो।
इंटरेस्ट रेट्स पर Nomura का अलग नजरिया
इंटरेस्ट रेट्स के बारे में, आम बाजार की राय है कि साल के अंत तक इनमें धीमी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि, Nomura का नजरिया अलग है। फर्म का मानना है कि सबड्यूड कोर इन्फ्लेशन (muted core inflation) के कारण पॉलिसी रेट्स में इस साल के बाकी बचे समय और 2027 की शुरुआत तक कोई बदलाव नहीं होने की संभावना है।
आगे का रास्ता
आगे चलकर, ग्लोबल इकोनॉमिक कंडीशंस और डोमेस्टिक पॉलिसी का तालमेल महत्वपूर्ण होगा। इकोनॉमी के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर्स में IT सर्विसेज एक्सपोर्ट्स पर AI का प्रभाव, फूड इन्फ्लेशन की दिशा और अस्थिर ग्लोबल माहौल में देश का भुगतान संतुलन कैसे मैनेज होता है, यह शामिल है।
