2024 के नोबेल पुरस्कार विजेता Daron Acemoglu ने AI को लेकर बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार, अगले एक दशक में AI केवल **5%** मानवीय कार्यों को ही रिप्लेस करेगा, जो इस डर को कम करता है कि AI पूरी तरह से नौकरियां खत्म कर देगा।
ऑटोमेशन की सच्चाई: क्या AI वाकई खतरा है?
दुनिया भर में फैली यह आशंका कि AI इंसानी नौकरियों को निगल जाएगा, शायद सच न हो। Daron Acemoglu का मानना है कि 2036 तक AI सिर्फ 5% कार्यों को ही ऑटोमेट कर पाएगा। इसका मुख्य कारण कॉर्पोरेट वर्कफ्लो की जटिलता और इंसानी निर्णय लेने की क्षमता का महत्व है। हालांकि AI मॉडल सटीक हैं, लेकिन जटिल व्यावसायिक प्रक्रियाओं में पूरी तरह स्वायत्त (autonomous) काम करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारतीय IT सेक्टर के लिए संकेत
भारतीय IT कंपनियों के लिए यह एक 'रियलिटी चेक' है। वर्षों से चला आ रहा ट्रेडिशनल आउटसोर्सिंग मॉडल, जहाँ ज्यादा इंजीनियर मतलब ज्यादा मुनाफा था, अब बदल रहा है। Tata Consultancy Services, Infosys, और HCL Technologies जैसी कंपनियां अब पुरानी लेबर-इंटेंसिव भूमिकाओं से हटकर हाई-वैल्यू सर्विस की ओर बढ़ रही हैं। ये कंपनियां 'एजेंटिक AI' (Agentic AI) को अपना रही हैं ताकि इंसानी क्षमता को बढ़ाया जा सके, न कि उसे हटाया जाए।
उत्पादकता पर जोर
निवेशकों के लिए मुख्य सीख यह है कि AI अब एक 'एग्जिस्टेंशियल क्राइसिस' नहीं बल्कि बिजनेस के विकास का एक जरिया बनता जा रहा है। जो कंपनियां AI का उपयोग वर्कर-फ्रेंडली तरीके से करेंगी, वही लंबी अवधि में बेहतर मार्जिन दिखाएंगी। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को कंपनियों के मार्जिन और स्टाफ ट्रेनिंग पर नजर रखनी होगी, क्योंकि अब खेल वॉल्यूम-आधारित भर्ती से हटकर वैल्यू-आधारित प्रोडक्टिविटी की ओर शिफ्ट हो रहा है।
