केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने विदर्भ क्षेत्र के लिए एक नया इंडस्ट्रियल रोडमैप पेश किया है। इस प्लान का मुख्य फोकस स्टील मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और आधुनिक एग्री-प्रोसेसिंग पर है ताकि क्षेत्र के संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सके।
स्टील और कृषि में बड़ा बदलाव
नागपुर में आयोजित 'विकसित विदर्भ समिट' के दौरान नितिन गडकरी ने साफ किया कि विदर्भ अब केवल कच्चे माल का निर्यातक नहीं रहेगा। गडचिरोली जिले में मौजूद भारी आयरन ओर के भंडार का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर स्टील मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए किया जाएगा। इससे न केवल रॉ मटेरियल की वैल्यू बढ़ेगी, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय रोजगार भी पैदा होंगे।
वहीं, कृषि क्षेत्र को हाई-टेक बनाने की तैयारी है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और मॉइस्चर मॉनिटरिंग जैसे टूल्स का उपयोग किया जाएगा। कपास, संतरा और चावल जैसी फसलों के लिए कोल्ड-चेन और प्रोसेसिंग फैसिलिटी विकसित की जाएंगी ताकि एक्सपोर्ट क्वालिटी को बेहतर किया जा सके।
निवेश और चुनौतियां
फरवरी 2026 में हुए 'एडवांटेज विदर्भ' इवेंट में करीब ₹42,000 करोड़ से ₹45,000 करोड़ के निवेश समझौते हुए थे। हालांकि, इन वादों का असल असर प्रोजेक्ट्स के धरातल पर उतरने से ही दिखेगा।
निवेशकों के लिए कुछ अहम चुनौतियां भी हैं। विदर्भ में फिलहाल सिंचाई का दायरा केवल 20% है, जिसे सुधारने की तत्काल जरूरत है। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी को बेहतर करना और गडचिरोली जैसे इलाकों में खनन परियोजनाओं के लिए सरकारी व पर्यावरणीय मंजूरी हासिल करना बड़ी बाधाएं हो सकती हैं। जमीन अधिग्रहण और प्रशासनिक देरी को सुलझाना सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
