Niti Aayog ने पश्चिम बंगाल के लो क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो (Credit-Deposit Ratio) पर चिंता जताई है, जो कि **51.6%** है, जबकि नेशनल एवरेज **80.1%** है। राज्य में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और लैंड एक्विजिशन पॉलिसी में सुधार की जरूरत बताई गई है।
आर्थिक मोर्चे पर चिंता
Niti Aayog ने पश्चिम बंगाल के इंडस्ट्रियल लैंडस्केप को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। राज्य का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो यानी CD रेशियो अभी महज 51.6% पर है, जो राष्ट्रीय औसत 80.1% से काफी कम है। इसका सीधा मतलब यह है कि राज्य के डिपॉजिट्स का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर बिजनेस या इंडस्ट्रीज के विकास में नहीं, बल्कि अन्य राज्यों की ओर जा रहा है।
कैसे बदलेगी तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य को 'एंकर टेनेंट्स' (Anchor Tenants) यानी बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को आकर्षित करना होगा। आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में प्रति लाख आबादी पर करीब 10 रजिस्टर्ड फैक्ट्रियां हैं, जबकि देश का औसत 18 है। डीप-सी पोर्ट्स और इंडस्ट्रियल पार्क बनाकर इस अंतर को कम किया जा सकता है। बैंकों का भी यह रुख रहता है कि वे बड़ी कंपनियों को लोन देना ज्यादा सुरक्षित और किफायती मानते हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
हालांकि, निवेश के लिए राज्य के सामने 'सिंगूर' जैसे ऐतिहासिक विवाद एक बड़ी चुनौती रहे हैं। निवेशक अभी भी स्पष्ट और सुरक्षित लैंड एक्विजिशन पॉलिसी (Land Acquisition Policy) की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार की आगामी इंडस्ट्रियल पॉलिसी और उसमें मिलने वाले टैक्स इंसेंटिव्स (GST छूट और बिजली शुल्क माफी) पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं। राज्य का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वे निवेशकों को विवाद-मुक्त और स्थिर माहौल देने में कितने सफल होते हैं।
