Zerodha के CEO Nithin Kamath ने भारतीय बाजार के दो अलग-अलग चेहरों की ओर इशारा किया है। जहाँ एक तरफ IPO मार्केट जबरदस्त परफॉर्म कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सेकेंडरी मार्केट में दबाव बना हुआ है। हाल ही में RBI द्वारा रेपो रेट को **5.5%** तक बढ़ाने के बाद Nifty 50 अपने पीक से **14.3%** नीचे है, जबकि हालिया IPOs में से **67%** से ज्यादा अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं।
बाजार का अजीब विरोधाभास
इक्विटी मार्केट में इस समय कुछ ऐसा दिख रहा है जो निवेशकों को उलझन में डाल रहा है। एक तरफ जहाँ पुरानी और दिग्गज कंपनियां दबाव में हैं, वहीं प्राइमरी मार्केट यानी IPOs में जबरदस्त हलचल बनी हुई है। पिछले एक साल (अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026) का डेटा देखें तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आती है। इस दौरान लिस्ट हुई 67.2% कंपनियां अपने इश्यू प्राइस से ऊपर कारोबार कर रही हैं और निवेशकों को औसतन 24.7% का रिटर्न दे चुकी हैं। यह साफ दर्शाता है कि मार्केट की लिक्विडिटी सेकेंडरी मार्केट से निकलकर नए IPOs की तरफ तेजी से भाग रही है।
सेकेंडरी मार्केट क्यों है दबाव में?
दूसरी तरफ सेकेंडरी मार्केट में हालात काफी चुनौतीपूर्ण हैं। Nifty 50 इंडेक्स 7 अक्टूबर, 2026 को 22,603 के स्तर पर बंद हुआ, जो इसके ऑल-टाइम हाई 26,373.20 से करीब 14.3% नीचे है। भू-राजनीतिक अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों का मूड खराब कर रखा है।
RBI का एक्शन और चुनौती
बाजार की इस सुस्ती में RBI का फैसला भी बड़ा फैक्टर रहा है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% कर दिया है। इससे कंपनियों और आम लोगों के लिए लोन लेना महंगा हो गया है, जिसका असर भविष्य के कॉर्पोरेट मुनाफे और मार्केट की लिक्विडिटी पर पड़ना तय है।
अब सवाल यह है कि क्या यह तेजी लंबे समय तक टिक पाएगी? अगर सेकेंडरी मार्केट का बेयरिश ट्रेंड इसी तरह जारी रहा, तो नए IPOs की चमक भी फीकी पड़ सकती है। आने वाले समय में Nifty 50 की स्टेबिलिटी और RBI के अगले कदम पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
