वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिकागो में वैश्विक निवेशकों से अपील की है कि वे भारत को सिर्फ एक कंज्यूमर मार्केट के रूप में न देखें, बल्कि इसे मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के एक बड़े केंद्र के रूप में अपनाएं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का शिकागो दौरा भारत की आर्थिक छवि को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने साफ किया है कि भारत अब केवल सामान खपाने वाला बाजार नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू इंजीनियरिंग और तकनीक के क्षेत्र में एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म बनने की ओर अग्रसर है।
एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक पर जोर
सरकार का लक्ष्य भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाना है। इसके लिए सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोनॉमस सिस्टम्स जैसे सेक्टरों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार की PLI (Production-Linked Incentive) स्कीम का मुख्य मकसद सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर कल-पुर्जों का निर्माण करना है, जिससे भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का सही इस्तेमाल हो सके।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत
निर्मला सीतारमण ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे UPI, Aadhaar और ONDC का हवाला देते हुए कहा कि ये सिस्टम बिजनेस करने में आने वाली दिक्कतों को काफी कम करते हैं।
साथ ही, GIFT City को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विस के एक बड़े हब के रूप में पेश किया गया है। जून 2026 तक, GIFT IFSC में 1,250 से ज्यादा कंपनियां रजिस्टर हो चुकी हैं। अब यहाँ एयरक्राफ्ट लीजिंग और सस्टेनेबल फाइनेंस जैसी आधुनिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि विदेशी निवेशकों को कैपिटल मैनेजमेंट में आसानी हो।
आगे की चुनौतियां और एजेंडा
निवेशकों के लिए इस रणनीति की सफलता नीतियों के सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। साथ ही, GIFT IFSC में वित्तीय नियमों और कंप्लायंस का पालन करना भी कंपनियों के लिए एक अहम हिस्सा रहेगा। यह दौरा कनाडा की यात्रा के बाद हुआ है और अब सबकी नजरें 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को नॉर्थ कैरोलिना में होने वाली G20 फाइनेंस मिनिस्टर्स की मीटिंग पर टिकी हैं, जहां ग्लोबल इकोनॉमिक पॉलिसी पर बड़ी चर्चा होने की उम्मीद है।
