भारत की इकॉनमी इस फाइनेंशियल ईयर में **7%** की रफ्तार से बढ़ने को तैयार है, लेकिन Kotak AMC के Nilesh Shah ने कच्चे तेल की कीमतों और मानसून की कमी को लेकर चेतावनी दी है।
ग्रोथ की राह में चुनौतियां
Kotak Mahindra Asset Management Company के MD Nilesh Shah का मानना है कि मौजूदा आर्थिक संकेत मजबूत तो हैं, लेकिन अगले साल तक इस मोमेंटम को बरकरार रखना मुश्किल हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता एनर्जी और मौसम से जुड़ी है। भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ रही हैं, जो सीधे तौर पर भारत के इंपोर्ट बिल को बढ़ा रही हैं। इसका असर रुपये की मजबूती और महंगाई (Inflation) पर पड़ना तय है।
अगर महंगाई काबू में नहीं आती है, तो Reserve Bank of India को ब्याज दरों को ऊंचा रखना पड़ेगा, जिससे कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और उनके मुनाफे पर बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा, मानसून में 12% की कमी ने भी कृषि उत्पादन और खाने-पीने की चीजों की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
बाजार का हाल और FPI की बिकवाली
इक्विटी मार्केट में फिलहाल भारी दबाव है। साल 2026 में विदेशी निवेशकों (FPIs) ने रिकॉर्ड तोड़ बिकवाली की है और उनका पैसा भारत से निकलकर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों की ओर जा रहा है। कुल आउटफ्लो ₹2.6 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है।
वहीं, घरेलू स्तर पर भी लिक्विडिटी का संकट दिख रहा है। पिछले 3 सालों में कंपनियों ने IPO, QIP और OFS के जरिए $50 बिलियन से ज्यादा का फंड जुटाया है, जिससे बाजार में शेयरों की सप्लाई बहुत बढ़ गई है। फिलहाल बाजार दो हिस्सों में बंटा है, जहाँ रिटेल निवेशक स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में दांव लगा रहे हैं, जबकि बड़ी कंपनियां यानी लार्ज-कैप स्टॉक्स पर संस्थागत निवेशकों का भरोसा कम होता दिख रहा है।
निवेशकों के लिए सलाह
Nilesh Shah के अनुसार, अब बाजार में अंधाधुंध खरीदारी का समय नहीं है। निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका अर्निंग क्वालिटी (Earnings Quality) बेहतर है। आगे चलकर ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम और महंगाई के आंकड़े बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
