S&P 100 से बाहर होने के बाद अब Nike पर Dow Jones Industrial Average से भी हटने का खतरा मंडरा रहा है। कम शेयर प्राइस और गिरती मार्केट इन्फ्लुएंस कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।
स्पोर्ट्सवियर दिग्गज Nike के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कंपनी को 21 सितंबर, 2026 से S&P 100 इंडेक्स से बाहर किया जाना तय है, और अब इस खबर ने Dow Jones में उसकी जगह को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं। निवेशकों को सबसे बड़ा डर यह है कि इंडेक्स से बाहर होने पर पैसिव फंड्स की बिकवाली बढ़ सकती है, जिससे शेयर पर और दबाव आएगा।
क्यों कमजोर हुई Nike की पोजीशन?
दुनिया के अन्य प्रमुख इंडेक्स मार्केट कैप के आधार पर काम करते हैं, लेकिन Dow Jones एक 'प्राइस-वेटेड' (Price-weighted) इंडेक्स है। इसका मतलब यह है कि इंडेक्स में कंपनी का महत्व उसकी कुल वैल्यू से नहीं, बल्कि शेयर की कीमत से तय होता है। फिलहाल Nike का शेयर करीब $36 पर ट्रेड कर रहा है, जो इसे 30 कंपनियों वाले इस इंडेक्स का सबसे छोटा हिस्सा बनाता है। इंडेक्स में इसकी हिस्सेदारी मात्र 0.4% है। इतिहास गवाह है कि जो कंपनी इंडेक्स में सबसे कम वेटेज रखती है, उसके बाहर होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है—जैसा कि पहले Verizon Communications के साथ हुआ था।
CEO का संघर्ष और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
साल 2024 में CEO Elliott Hill के लौटने के बाद से कंपनी अपने बिजनेस को सुधारने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इनोवेशन की कमी और बाजार में नए व छोटे ब्रांड्स से मिल रही तगड़ी टक्कर के कारण Nike पिछड़ रही है। दूसरी ओर, Goldman Sachs जैसे स्टॉक्स $900 से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जो Nike और अन्य मेंबर्स के बीच एक बड़ा अंतर पैदा करते हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
इंडेक्स कमिटी, जिसमें S&P Dow Jones Indices और The Wall Street Journal के प्रतिनिधि शामिल हैं, अभी अपने फैसले सार्वजनिक नहीं करती। निवेशकों को अब केवल यह देखना होगा कि क्या इंडेक्स-ट्रैकिंग फंड्स की रीबैलेंसिंग के कारण शेयर में और बिकवाली आती है या नहीं। फिलहाल, कंपनी का भविष्य उसके नए प्रोडक्ट्स के इनोवेशन और मार्केट शेयर रिकवरी पर टिका है।
