Nifty और Sensex की लगातार चौथे दिन बढ़त, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Nifty और Sensex की लगातार चौथे दिन बढ़त, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर

भारतीय शेयर बाजारों, Nifty और Sensex, ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और मध्य पूर्व में तनाव कम होने से बाजार को सहारा मिला। विदेशी निवेश और मजबूत रुपये ने इस रैली को गति दी, हालांकि निवेशक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि को लेकर सतर्क हैं। बाजार डेरिवेटिव-लिंक्ड स्टॉक्स के लिए सेबी द्वारा अनिवार्य नई क्लोजिंग ऑक्शन प्रणाली के अनुसार भी समायोजित हुआ।

बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी

मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक momentum बना रहा। BSE Sensex और NSE Nifty50 दोनों ने लगातार चौथे दिन बढ़त दर्ज की। इस तेजी का मुख्य कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही, जिससे महंगाई का दबाव कम होने और कॉर्पोरेट मुनाफे की उम्मीदें बढ़ी हैं। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और कई सेक्टर्स में खरीदारी देखने को मिली।

सेबी की नई क्लोजिंग ऑक्शन प्रणाली

इस ट्रेडिंग सत्र में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा अनिवार्य एक नई क्लोजिंग ऑक्शन प्रणाली लागू की गई। यह प्रणाली डेरिवेटिव से जुड़े स्टॉक्स के क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) की पुरानी विधि की जगह लेगी। अब, कंटीन्यूअस ट्रेडिंग के बाद 20 मिनट की एक ऑक्शन फेज शामिल होगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बदलाव से संस्थागत ऑर्डर्स में एकाग्रता आ सकती है, जिससे बाजार बंद होने से ठीक पहले कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इस ढांचे का उद्देश्य भारतीय बाजार की प्रथाओं को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना और मूल्य खोज (price discovery) की प्रक्रिया में सुधार करना है।

मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स का असर

कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने मौजूदा बाजार सेंटीमेंट को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। कम तेल लागत भारत के आयात बिल के लिए सकारात्मक मानी जाती है और घरेलू मुद्रास्फीति (inflation) को लेकर चिंताओं को कम करने में मदद कर सकती है। इसके अतिरिक्त, मजबूत होते रुपये और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से फिर से मिले निवेश ने बाजार में आवश्यक लिक्विडिटी प्रदान की है। हालांकि सेंटीमेंट में सुधार हुआ है, विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी उभरते बाजारों के लिए एक बड़ा जोखिम बनी हुई है। अमेरिका में उच्च यील्ड कभी-कभी उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी को आकर्षित कर सकती है, जिस पर निवेशकों को बारीकी से नजर रखनी चाहिए।

सेक्टर-वार प्रदर्शन और निवेशक का नजरिया

टेक्नोलॉजी, सर्विसेज, इंडस्ट्रियल्स, FMCG और मेटल्स जैसे सेक्टर्स में तेजी देखने को मिली। InterGlobe Aviation, Tata Consultancy Services, Infosys, ITC और Axis Bank जैसे प्रमुख शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। यह सकारात्मक momentum लार्ज-कैप स्टॉक्स से आगे बढ़कर BSE MidCap और SmallCap इंडेक्स में भी देखा गया। भविष्य में, निवेशक कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ, वैश्विक तेल की कीमतों के रुझान और नई क्लोजिंग ऑक्शन प्रणाली के दैनिक मूल्य स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभाव की निगरानी करेंगे, क्योंकि प्रतिभागी नई ट्रेडिंग व्यवस्था के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.