भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को सुस्ती छाई रही। विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार 11वें दिन बिकवाली के कारण मार्केट दबाव में है, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) इसे सहारा दे रहे हैं। रुपये में गिरावट को रोकने के लिए RBI ने बड़ा कदम उठाया है।
भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार, 12 अक्टूबर को सुस्ती का माहौल रहा। Nifty 50 इंडेक्स एक तरफ विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और दूसरी तरफ घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बीच फंसा हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की निकासी का यह लगातार 11वां दिन है।
आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगभग ₹44,166 करोड़ बाजार से बाहर निकाले हैं। इसका मुख्य कारण अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला बेहतर रिटर्न और डॉलर की मजबूती है, जिसने इमर्जिंग मार्केट्स से ग्लोबल फंड्स को अपनी ओर खींचा है। बाजार में भारी गिरावट इसलिए नहीं आई क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी का मोर्चा संभाल रखा है।
रुपये को बचाने के लिए RBI का एक्शन
रुपये की गिरती कीमत को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कड़े कदम उठाए हैं। रुपया डॉलर के मुकाबले 96.73 के स्तर के करीब बना हुआ है। RBI ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, HPCL और BPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों के लिए सीधे डॉलर सप्लाई विंडो शुरू की है ताकि उन्हें ओपन मार्केट से डॉलर न खरीदना पड़े, जिससे रुपये पर दबाव कम हो।
इसके अलावा, करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी को रोकने के लिए RBI ने रुपये के डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के नियमों को सख्त कर दिया है। अब एक्सचेंज-ट्रेडेड रुपये की पोजीशन की सीमा को $100 मिलियन से घटाकर महज $5 मिलियन कर दिया गया है।
ग्लोबल संकेत बने सिरदर्द
बाजार की चिंताएं बाहरी कारणों से भी बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $103 से $104 प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जो भारत के लिए चिंताजनक है। वहीं, अमेरिका का 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.24% पर है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड इतनी अधिक होती है, तो ग्लोबल फंड्स भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स के बजाय अमेरिका में निवेश करना पसंद करते हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि RBI के नए उपायों का असर रुपये पर कितना होता है और क्या FII बिकवाली का दौर जल्द थमेगा या नहीं।
