भारतीय शेयर बाजार के लिए अक्टूबर की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण रही है। Nifty 50 में लगातार सेलिंग प्रेशर देखा जा रहा है और अब इंडेक्स अपने क्रिटिकल सपोर्ट लेवल **22,500** के बेहद करीब खड़ा है।
बाजार की मौजूदा स्थिति
सितंबर के सुस्त प्रदर्शन के बाद अक्टूबर की शुरुआत भी निवेशकों के लिए राहत भरी नहीं रही है। 30 सितंबर, 2026 को Nifty 50 22,620 के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार अब 22,500 से 22,600 के उस महत्वपूर्ण जोन में है, जिसे तकनीकी भाषा में 'सपोर्ट' कहा जाता है। यानी यह एक ऐसा फर्श है, जहां से बाजार के संभलने की उम्मीद होती है।
गिरावट की असली वजह
इंडेक्स अपने हालिया हाई 24,774 से काफी नीचे आ चुका है। इस गिरावट में सबसे बड़ा रोल विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का है, जो लगातार अपनी होल्डिंग्स बेच रहे हैं। अगर Nifty 22,500 के इस लेवल को बचाने में नाकाम रहता है, तो जानकारों का मानना है कि बिकवाली का यह दौर इंडेक्स को 22,300 से 22,400 के दायरे में धकेल सकता है।
ग्लोबल और घरेलू दबाव
बाजार के मूड को खराब करने में बाहरी कारकों का बड़ा हाथ है:
- क्रूड ऑयल: ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और आयात बिल बढ़ने का डर है।
- US ट्रेजरी यील्ड्स: अमेरिका में यील्ड बढ़ने से ग्लोबल निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकाल रहे हैं।
- RBI पॉलिसी: भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी पॉलिसी मीटिंग को लेकर भी निवेशक सतर्क हैं।
आगे क्या उम्मीद करें?
इंडेक्स ने 200-वीक मूविंग एवरेज के पास थोड़ा ठहराव तो दिखाया है, लेकिन फिलहाल रुझान कमजोर है। अगर बाजार में थोड़ी तेजी आती भी है, तो 22,800 से 23,000 के स्तर पर भारी बिकवाली का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या 22,500 का यह 'फर्श' बच पाएगा या बाजार और नीचे की गोता लगाएगा।
