Nifty 50: क्रूड ऑयल और US बॉन्ड यील्ड की मार, ब्रोकरेज ने घटाया निफ्टी का टारगेट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Nifty 50: क्रूड ऑयल और US बॉन्ड यील्ड की मार, ब्रोकरेज ने घटाया निफ्टी का टारगेट

ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेस ने साल के अंत के लिए Nifty 50 का टारगेट घटाकर **26,000–27,000** के दायरे में कर दिया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं।

ग्लोबल सेंटिमेंट में बदलाव

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों ने भारतीय बाजार को लेकर अपना नजरिया बदला है। साल की शुरुआत के मुकाबले अब माहौल चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसका सबसे बड़ा कारण Brent Crude का $100 प्रति बैरल से ऊपर बना रहना है, जिससे आयात बिल बढ़ रहा है और कंपनियों के मुनाफे पर सीधा दबाव दिख रहा है।

क्यों घबरा रहे हैं विदेशी निवेशक (FIIs)?

अमेरिकी 10-year Treasury yield के 5% के पार जाने से भारत और अमेरिका के बीच का ब्याज दर का अंतर (Spread) घटकर मात्र 200 बेसिस पॉइंट्स रह गया है, जो पिछले दो दशकों में सबसे कम है। सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड के मुकाबले इमर्जिंग मार्केट्स अब कम आकर्षक लग रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 तक FIIs ने भारतीय शेयरों से करीब ₹2.45 लाख करोड़ निकाल लिए हैं, जिससे विदेशी हिस्सेदारी 17 साल के निचले स्तर पर आ गई है।

घरेलू निवेशकों का सहारा और RBI की तैयारी

विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार को घरेलू निवेशकों और SIPs का मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय बैंक के पास रिकॉर्ड $785.7 बिलियन का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो बाजार में आने वाली किसी भी बड़ी अस्थिरता को रोकने के लिए एक बड़ा बफर (Safety Net) है।

आगे क्या करें निवेशक?

अब सबकी नजर कंपनियों के नतीजों पर है। कंपनियां बढ़ती लागत का दबाव मार्जिन पर कितना पड़ने देती हैं, यह बाजार की अगली दिशा तय करेगा। निवेशकों को कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे कैसे अपनी डिमांड और प्राइसिंग पावर को मैनेज कर रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.