ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के चलते Nifty 50 में भारी गिरावट देखी गई है। इंडेक्स **22,850** के अहम सपोर्ट लेवल के नीचे बंद हुआ है, जिसका मुख्य कारण Brent Crude की कीमतों में उछाल है। कच्चा तेल **$106.7** प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता दबाव भरा रहा है। Nifty 50 इंडेक्स के 22,850 के स्तर से नीचे गिरने से बाजार की लगातार सात हफ्तों की कमजोरी का सिलसिला जारी है। मार्केट का वैल्युएशन अब पिछले छह महीनों के निचले स्तर पर आ गया है।
क्यों बढ़ रही है बाजार में घबराहट?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता रुकने के बाद Brent Crude के दाम $106.7 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर देश के ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) पर पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होता है और ट्रांसपोर्ट व मैन्युफैक्चरिंग की लागत में भी इजाफा होता है।
कंपनियों के मुनाफे पर दबाव
सिर्फ मैक्रो-इकोनॉमी ही नहीं, बल्कि कंपनियों के नेट प्रॉफिट मार्जिन पर भी खतरा मंडरा रहा है। एनर्जी-इंटेंसिव सेक्टर जैसे कि ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और केमिकल कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ रही है। अगर ये कंपनियां अपना बढ़ा हुआ खर्च ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो इनके मुनाफे में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
आगे की चाल क्या होगी?
बाजार का मूड इस समय पूरी तरह से नेगेटिव है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 2,700 शेयरों में गिरावट रही, जबकि केवल 1,170 शेयर ही बढ़त के साथ बंद हुए। एक्सपर्ट्स की नजर अब 22,700 से 22,800 के सपोर्ट जोन पर है। अगर बाजार इस लेवल को होल्ड नहीं कर पाता है, तो बिकवाली का दौर और लंबा खिंच सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल सतर्क रहना और ग्लोबल घटनाक्रमों पर नजर रखना ही समझदारी है।
