ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में आज मुनाफावसूली हावी रही। Brent crude के **$107** के करीब पहुंचने और U.S. Federal Reserve की पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशकों की घबराहट ने Nifty 50 और Sensex को लाल निशान में धकेल दिया है।
भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को शुरुआती तेजी को बरकरार नहीं रख सके। बाजार में चौतरफा दबाव देखने को मिला, जिसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और U.S. Federal Reserve की आगामी बैठक रही।
क्रूड ऑयल और गिरता रुपया
बाजार पर सबसे भारी दबाव Brent crude की कीमतों में आई तेजी से पड़ा, जो $107 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में आई तकनीकी खराबी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। भारत के लिए, जो ऊर्जा का बड़ा आयातक है, तेल की ये बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ा रही हैं। इसका सीधा असर करेंसी मार्केट पर भी पड़ा है, जहां रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.80 के रेजिस्टेंस लेवल को टेस्ट कर रहा है।
फेड का 'रेट हाइक' डर
दुनियाभर के निवेशकों की निगाहें U.S. Federal Reserve की दो दिवसीय पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं। बाजार में 25 बेसिस पॉइंट्स तक की ब्याज दर वृद्धि की आशंका है। अमेरिका में लगातार बनी हुई महंगाई और मजबूत क्रेडिट डेटा ने निवेशकों में डर पैदा कर दिया है। फेड की सख्ती का मतलब है कि भारत जैसे उभरते बाजारों से Foreign Portfolio Investors (FPIs) अपना पैसा निकाल सकते हैं, जो पहले से ही इस महीने इक्विटी से भारी निकासी कर रहे हैं।
सेक्टर का हाल
गिरावट के बीच IT सेक्टर ने मार्केट को गिरने से बचाने का काम किया। निवेशकों ने जोखिम से बचते हुए TCS, HCL Technologies और Infosys जैसे लार्ज-कैप आईटी शेयरों में भरोसा दिखाया। वहीं, दूसरी ओर फाइनेंशियल और इंडस्ट्रियल शेयरों में तेज गिरावट दिखी, जहां Shriram Finance और Bharat Electronics में 3% से अधिक की कमजोरी रही।
आगे की राह
तकनीकी जानकारों के अनुसार, Nifty 50 के लिए 23,600 का स्तर रेजिस्टेंस के रूप में काम कर रहा है, जबकि 23,200 का जोन एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल बना हुआ है। अब बाजार की दिशा पूरी तरह से फेड के फैसले और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।
