आज 11 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में गैप-डाउन (gap-down) ओपनिंग के संकेत मिल रहे हैं। GIFT Nifty के **23,356** के स्तर पर कारोबार करने से साफ है कि बाजार दबाव में है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और US Treasury Yields में उछाल निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
बाजार पर डबल मार (Double-Whammy)
इस शुक्रवार भारतीय इक्विटी मार्केट की शुरुआत सुस्त रहने वाली है। GIFT Nifty के 23,356 पर ट्रेड करने से यह साफ है कि पिछले सत्र की बढ़त को संभालना Nifty 50 के लिए मुश्किल होगा। मार्केट का मूड बिगड़ने के पीछे दो बड़े कारण हैं—ऊर्जा की बढ़ती लागत और आसमान छूती बॉन्ड यील्ड्स।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतें $109 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। मिडिल ईस्ट में सप्लाई और शिपिंग रूट को लेकर जारी तनाव का असर सीधा भारत पर पड़ रहा है। एक बड़ा तेल आयातक होने के नाते, यह स्थिति भारत के इम्पोर्ट बिल को भारी नुकसान पहुंचाएगी, रुपया कमजोर होगा और देश में महंगाई का खतरा बढ़ेगा।
इसके साथ ही, US 10-year Treasury yield का 5% के स्तर पर पहुंचना ग्लोबल इन्वेस्टर्स को डरा रहा है। पैसा इमर्जिंग मार्केट्स से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहा है, यही वजह है कि विदेशी निवेशकों (FIIs) ने पिछले सत्र में ₹438 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹1,000 करोड़ से ज्यादा की खरीदारी कर मार्केट को सहारा देने की कोशिश की है।
सेक्टर पर असर
इस मैक्रो एनवायरमेंट का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर पड़ना तय है। खास तौर पर Oil Marketing Companies (OMCs) निशाने पर हैं। पेट्रोल और डीजल पर नेगेटिव मार्केटिंग मार्जिन की खबरें निवेशकों की नींद उड़ाए हुए हैं। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या घरेलू खरीदारी इस गिरावट को थाम पाएगी या फिर महंगाई का दबाव बाजार को और नीचे ले जाएगा।
