Nifty, Sensex में लगातार चौथे दिन गिरावट; ₹24,450 बना बड़ा रेजिस्टेंस

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nifty, Sensex में लगातार चौथे दिन गिरावट; ₹24,450 बना बड़ा रेजिस्टेंस

भारतीय शेयर बाज़ारों में शुक्रवार को कमजोरी का सिलसिला जारी रहा। Nifty **24,350** के नीचे कारोबार कर रहा है, जो लगातार चौथे दिन की गिरावट को दर्शाता है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली और ग्लोबल भू-राजनीतिक चिंताएं निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ रही हैं, और ट्रेडर्स **24,450** के रेजिस्टेंस लेवल पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

क्यों गिर रहा है बाज़ार?

शुक्रवार को भारतीय इक्विटी बाज़ारों में पॉजिटिव मोमेंटम लाने का संघर्ष जारी रहा, जिससे लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। Nifty 50 इंडेक्स 24,350 के स्तर से नीचे ट्रेड कर रहा था, जो मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच सतर्कता का माहौल दिखा रहा है, क्योंकि इंडेक्स एक संकीर्ण दायरे में कंसॉलिडेट कर रहे थे।

इस हालिया कमजोरी का मुख्य कारण फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली है। एक्सचेंज डेटा से पता चलता है कि विदेशी निवेशकों ने लगातार तीसरे सत्र में शेयर बेचे हैं, जिससे प्रमुख इंडेक्स के लिए बाइंग सपोर्ट कम हो गया है। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी मार्केट सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहा है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन और एनर्जी कॉस्ट को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

टेक्निकल लेवल पर क्या है खास?

टेक्निकल पॉइंट ऑफ व्यू से, ट्रेडर्स अगले मूव का अंदाजा लगाने के लिए कुछ खास ज़ोन पर नजर रख रहे हैं। Nifty 50 को 24,430 और 24,450 के बीच तत्काल रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है। इस रेंज से ऊपर एक मजबूत चाल इंडेक्स को ऊपरी लक्ष्यों की ओर मजबूती दिखाने के लिए जरूरी होगी। वहीं, नीचे की ओर, इंडेक्स को 24,260–24,265 ज़ोन में तत्काल सपोर्ट मिल रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह सपोर्ट लेवल बरकरार नहीं रहता है, तो इंडेक्स पर और दबाव देखा जा सकता है।

सेक्टर का हाल और आगे क्या?

ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी दिखी, जिसका अंदाजा नेगेटिव एडवांस-डिक्लाइन रेशियो से लगाया जा सकता है, यानी हरे निशान में बंद होने वाले शेयरों की तुलना में लाल निशान में बंद होने वाले शेयरों की संख्या अधिक थी। सेक्टर वाइज परफॉरमेंस मिली-जुली रही। Nifty मेटल और Nifty आईटी इंडेक्स में काफी बिकवाली का दबाव देखा गया, जो अक्सर तब होता है जब ग्लोबल सेंटिमेंट खराब होता है क्योंकि ये सेक्टर इंटरनेशनल डिमांड और कमोडिटी प्राइस में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील होते हैं। इसके विपरीत, Nifty मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टरों ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई, जो बताता है कि कुछ डोमेस्टिक-फोकस्ड थीम्स ब्रॉडर मार्केट गिरावट के बावजूद अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।

आगे निवेशक क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल स्थिरता को लेकर किसी भी अपडेट पर नजर रखेंगे, क्योंकि ये फैक्टर सीधे तौर पर भारत में महंगाई की उम्मीदों और फिस्कल कैलकुलेशन को प्रभावित करते हैं। वर्तमान कंसॉलिडेशन यह दर्शाता है कि बाज़ार किसी ताज़ा ट्रिगर का इंतजार कर रहा है, चाहे वह आने वाले कॉर्पोरेट अपडेट्स से हो या ग्लोबल रिस्क एपेटाइट में बदलाव से, ताकि मौजूदा ट्रेडिंग बैंड से बाहर निकल सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.