30 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार सपाट नजर आया। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का दबाव IT सेक्टर की तेजी से संतुलित होता दिखा। निवेशक Reliance Industries और Sun Pharma के नतीजों से पहले सतर्क हैं, जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप में बिकवाली दिखी।
30 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। जहाँ एक तरफ इकोनॉमिक चिंताएं हावी थीं, वहीं टेक्नोलॉजी सेक्टर ने एक ढाल की तरह काम किया। Nifty IT इंडेक्स में 1.6% की बढ़त देखी गई, जिसमें Infosys और Tech Mahindra का योगदान अहम रहा। जानकारों का मानना है कि महंगाई के दौर में IT सर्विसेज अन्य सेक्टर्स के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित निवेश मानी जाती हैं।
कच्चे तेल की आग
बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती Brent Crude का $116.10 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचना है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए बड़ा सिरदर्द हैं। केमिकल, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स की लागत बढ़ रही है, जिससे उनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है। क्रूड की इन कीमतों का असर रुपये की वैल्यू पर भी पड़ रहा है, जिससे सेंट्रल बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी पर दबाव बढ़ रहा है।
बाजार का मूड और नतीजों का इंतजार
ब्रॉड मार्केट में कमजोरी साफ दिखी। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 1.02% और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 1.57% तक फिसला। डर का पैमाना माना जाने वाला वोलैटिलिटी इंडेक्स बढ़कर 15.66 पर पहुंच गया है। अब निवेशकों की निगाहें Reliance Industries और Sun Pharma के तिमाही नतीजों पर टिकी हैं, क्योंकि इन कंपनियों का इंडेक्स में काफी ज्यादा वेटेज है।
आगे क्या करें निवेशक?
IT स्टॉक्स ने फिलहाल बाजार को सपोर्ट दिया है, लेकिन बाहरी दबाव बरकरार है। आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा Reliance और Sun Pharma के आंकड़ों से तय होगी। साथ ही, क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखना जरूरी है। जब तक स्थिति साफ नहीं होती, मिड-कैप और स्मॉल-कैप में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह है।
