भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का भारी दबाव है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते मार्केट में पिछले 25 वर्षों की सबसे लंबी गिरावट का सिलसिला जारी है।
25 साल का ऐतिहासिक गिरावट का दौर
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। Sensex और Nifty लगातार आठवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद होने की ओर बढ़ रहे हैं। यह एक ऐतिहासिक गिरावट है, ऐसी स्थिति पिछले 25 सालों में कभी नहीं देखी गई। इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह FIIs का रुख है, जिन्होंने पिछले केवल 2 ट्रेडिंग सेशन में ₹20,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेच डाले हैं।
क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक?
इस बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिका की 10-year bond yield है, जो बढ़कर 5.3% के स्तर पर पहुंच गई है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट की तुलना में अमेरिकी फिक्स्ड-इनकम एसेट्स ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक हो जाते हैं। नतीजा यह है कि पैसा भारतीय बाजार से निकलकर सीधे अमेरिका जा रहा है।
कौन से सेक्टर बचे, कहां हुई भारी मार?
मार्केट में गिरावट के बावजूद कुछ चुनिंदा सेक्टर में दम दिख रहा है। IT और प्राइवेट बैंक जैसे डिफेंसिव सेक्टर ने कुछ हद तक अपना बचाव किया है, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के दौर में इन्हें सुरक्षित मानते हैं। इसके उलट, Nifty Auto, Realty, Cement और Healthcare इंडेक्स में भारी बिकवाली हुई है।
राहत की एक उम्मीद: गिरते कच्चे तेल के दाम
गिरावट के बीच बाजार के लिए एकमात्र सकारात्मक संकेत Brent crude oil है, जिसके दाम $100 प्रति बैरल से नीचे आ गए हैं। कच्चे तेल के दाम कम होने से भारत के महंगाई दर और कॉर्पोरेट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, फिलहाल FIIs की आक्रामक बिकवाली के सामने यह राहत बहुत छोटी नजर आ रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स इस गिरावट को थाम पाएंगे या नहीं।
