भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता निराशाजनक रहा है। Nifty 50 लगातार सातवें हफ्ते गिरावट के साथ **23,140.50** के स्तर पर बंद हुआ है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के दबाव के चलते निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर बना हुआ है।
शुक्रवार के कारोबार में Nifty 77 अंक चढ़कर 23,140.50 पर जरूर बंद हुआ, लेकिन यह तेजी मंदी के बड़े ट्रेंड को तोड़ने के लिए नाकाफी रही। Sensex में भी 0.43% की मामूली बढ़त देखी गई और यह 73,895.74 पर बंद हुआ। बाजार पर इस वक्त घरेलू मोर्चे की मजबूती के बजाय वैश्विक दबाव हावी है।
बाजार पर ग्लोबल दबाव क्यों है?
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का $100 प्रति बैरल के ऊपर बने रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा रिस्क है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने और एविएशन, पेंट्स व टायर जैसी कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने का डर है। इसके साथ ही, US 10-Year Treasury Yield का 5.2% के पास पहुंचना, जो कि साल 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है, विदेशी निवेशकों (FIIs) को भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर US बॉन्ड की तरफ खींच रहा है।
अब आगे क्या?
निवेशकों की निगाहें अब 23,000 के अहम सपोर्ट लेवल पर टिकी हैं। शुक्रवार को इंडिया VIX 3.4% गिरकर 12.13 पर रहा, जो बताता है कि डर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन रिकवरी अभी भी नाजुक है। ऑटो, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में कुछ खरीदारी जरूर दिखी है, लेकिन आईटी और हेल्थकेयर स्टॉक्स में बिकवाली ने तेजी को थाम दिया है।
बाजार की नजर अब फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की अगली पॉलिसी बैठक पर है, जहां 70% संभावना है कि ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या आने वाले घरेलू इकोनॉमिक डेटा इस दबाव को झेल पाएंगे या नहीं।
