5 अगस्त 2026 को Nifty Futures में अच्छी शुरुआत देखने को मिली। ग्लोबल मार्केट से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इंडेक्स फिलहाल **24,600** के अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है और **24,800** के टारगेट की ओर बढ़ सकता है। अब सभी की निगाहें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के फैसले पर टिकी हैं।
Nifty Futures की तूफानी शुरुआत
5 अगस्त 2026 को Nifty Futures ने ट्रेडिंग सेशन की शुरुआत एक जोरदार गैप-अप के साथ की, जो बाजार की भावना में एक मजबूत वापसी का संकेत देता है। इंडेक्स फिलहाल पॉजिटिव मोमेंटम के साथ ट्रेड कर रहा है, जो हाल के सपोर्ट लेवल से रिकवरी पर टिका है। इस तेजी का मुख्य कारण ग्लोबल टेंशन में कमी है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक विकास की रिपोर्टें, जिन्होंने कच्चे तेल की कीमतों को moderating में मदद की है। तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आम तौर पर एक सकारात्मक कारक माना जाता है, क्योंकि यह आयात लागत को नियंत्रित करने में मदद करता है।
24,600 का लेवल क्यों है अहम?
टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार, 24,600 का लेवल मौजूदा सेशन के लिए क्रिटिकल पिवट ज़ोन है। इंट्राडे ट्रेंड को कंस्ट्रक्टिव बनाए रखने के लिए, इंडेक्स को इस मार्क के ऊपर बने रहना होगा। यदि इंडेक्स इस सपोर्ट को बनाए रखने में कामयाब होता है, तो यह 24,800 के रेजिस्टेंस लेवल की ओर बढ़ सकता है। मार्केट की एक्टिविटी से पता चलता है कि तत्काल फोकस इस बात पर है कि क्या इंडेक्स अपनी बढ़त को कंसॉलिडेट कर पाएगा या ऊपरी रेंज के पास सेलिंग प्रेशर का सामना करेगा।
RBI की पॉलिसी पर सबकी नज़र
फिलहाल सेंटीमेंट पॉजिटिव है, लेकिन आने वाली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की घोषणा के कारण मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच सावधानी बनी हुई है। इंटरेस्ट रेट पॉलिसी की घोषणाएं अक्सर अस्थिरता को बढ़ाती हैं, क्योंकि ट्रेडर्स और निवेशक इन्फ्लेशन और आर्थिक विकास पर सेंट्रल बैंक के रुख के साथ अपने पोजीशन को अलाइन करने का इंतजार करते हैं। इन पॉलिसी मीटिंग्स का नतीजा मार्केट की दिशा निर्धारित करने वाला एक प्रमुख कारक है, जो अक्सर शॉर्ट-टर्म टेक्निकल सेटअप्स को ओवरशैडो करता है।
जोखिम और आगे क्या?
मार्केट के लिए मुख्य जोखिम 24,600 के सपोर्ट लेवल के टूटने में निहित है। यदि इंडेक्स इस थ्रेशोल्ड को बनाए रखने में विफल रहता है, तो यह एक गिरावट को ट्रिगर कर सकता है, जिसमें अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन 24,400 से 24,500 के आसपास पहचाना गया है। इसके अतिरिक्त, जबकि कच्चे तेल की कीमतों ने कुछ राहत प्रदान की है, भू-राजनीतिक स्थितियां अप्रत्याशित हो सकती हैं, और कोई भी अचानक वृद्धि मौजूदा सेंटीमेंट को उलट सकती है।
बाकी दिन और निकट भविष्य के लिए, निवेशकों को RBI पॉलिसी कमेंट्री की निगरानी करनी चाहिए, क्योंकि यह संभवतः मार्केट लिक्विडिटी और इंटरेस्ट रेट की उम्मीदों के लिए टोन सेट करेगा। तेल उत्पादक क्षेत्रों के संबंध में वैश्विक भू-राजनीतिक बयानबाजी में कोई भी तेज बदलाव भी संभावित मार्केट वोलेटिलिटी के लिए एक प्रमुख वेरिएबल बना रहेगा।
