मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों में चार दिनों की तेजी का सिलसिला टूट गया। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के ऐलान से पहले निवेशकों ने सावधानी बरतते हुए बिकवाली की, जिसके चलते Nifty 50 इंडेक्स **0.64%** गिरकर **24,614.90** पर बंद हुआ। रियलटी (Realty) और IT स्टॉक्स बिकवाली के दबाव में रहे, हालांकि मीडिया (Media) और मेटल (Metal) सेक्टर में कुछ मजबूती दिखी।
RBI की पॉलिसी के फैसले का इंतजार
मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में गिरावट देखने को मिली, जिसने लगातार चार दिनों की तेजी पर ब्रेक लगा दिया। निवेशक भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। Nifty 50 इंडेक्स 159.40 अंक यानी 0.64% की गिरावट के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ। वहीं, BSE Sensex 210.08 अंक या 0.27% टूटकर 78,428.95 पर बंद हुआ। बाज़ार की अस्थिरता, जिसे इंडिया VIX (India VIX) से मापा जाता है, सत्र के दौरान करीब 2% बढ़ी, जो निवेशकों की बढ़ी हुई सतर्कता का संकेत है।
सेक्टरों का प्रदर्शन: मिला-जुला रहा
बाज़ार में गिरावट व्यापक रही। रियलटी सेक्टर सबसे ज़्यादा 2.39% लुढ़क गया। IT स्टॉक्स पर भी बिकवाली का दबाव देखा गया, Nifty IT इंडेक्स हालिया तेज़ी के बाद 0.82% नीचे आया। फाइनेंशियल सर्विसेज, FMCG और ऑटो जैसे प्रमुख सेक्टर भी गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, कुछ सेक्टरों में तेज़ी बनी रही। Nifty Media इंडेक्स 2.03% चढ़ा, और मेटल इंडेक्स 0.91% की बढ़त के साथ बंद हुआ। जानकारों का कहना है कि Nifty इंडेक्स का Sensex के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन, हाल ही में लागू हुए फ्यूचर्स और ऑप्शन्स (F&O) सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session) मैकेनिज़्म के समायोजन का भी एक हिस्सा है।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाज़ार की धारणा को प्रभावित किया। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) 2.46% बढ़कर $85.83 प्रति बैरल रहा, जबकि WTI क्रूड (WTI crude) 1.83% चढ़कर $81.81 प्रति बैरल पर पहुंच गया। बढ़ती ऊर्जा लागत अक्सर महंगाई (Inflation) और लॉजिस्टिक्स-भारी उद्योगों के संचालन लागत को लेकर निवेशकों की धारणा को प्रभावित करती है। इस बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.3775 पर स्थिर बना रहा, जिसे विदेशी पोर्टफोलियो इनफ्लो (Foreign Portfolio Inflows) और इम्पोर्टर्स (Importers) की मांग के बीच संतुलन का सहारा मिला।
RBI पॉलिसी से पहले निवेशक क्या देखें?
RBI अपनी आगामी पॉलिसी रिव्यू में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। निवेशक महंगाई प्रबंधन, बैंकिंग सिस्टम लिक्विडिटी (Banking System Liquidity) और घरेलू अर्थव्यवस्था के ग्रोथ आउटलुक (Growth Outlook) पर RBI की टिप्पणियों पर नज़र रखेंगे। केंद्रीय बैंक मौजूदा दरों को बनाए रखने का इरादा रखता है या अपने रुख में बदलाव करेगा, इस पर कोई भी स्पष्ट संकेत बाज़ार की अगली दिशा के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इन पॉलिसी संकेतों पर नज़र रखना, साथ ही कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में होने वाले बदलावों पर भी बाज़ार सहभागियों के लिए आने वाले सत्रों में ज़रूरी रहेगा।
