18 अगस्त 2026 को Nifty 50 लगातार छठे कारोबारी सत्र में गिर गया, जो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच **24,154.90** पर बंद हुआ। बाजार की अस्थिरता बने रहने के कारण निवेशक **24,000** के सपोर्ट लेवल पर नजर बनाए हुए हैं।
क्यों गिरी भारतीय शेयर बाजार?
भारतीय शेयर बाजार में लगातार छठे दिन बिकवाली का दबाव देखा गया। 18 अगस्त 2026 को Nifty 50 इंडेक्स 132.75 अंक यानी 0.55% गिरकर 24,154.90 पर बंद हुआ। BSE Sensex भी इसी राह पर चला और 492.70 अंक गिरकर 77,235.46 पर आ गया। बाजार में यह लगातार गिरावट निवेशकों के बीच सावधानी को दर्शाती है, क्योंकि वैश्विक और घरेलू दबाव सेंटिमेंट पर भारी पड़ रहे हैं।
वैश्विक दबाव का असर
इस दौरान वैश्विक कारकों ने इंडेक्स को काफी नीचे खींचा। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $91 प्रति बैरल के पार जाना और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने चिंता बढ़ा दी, जिससे निवेशकों का रिस्क लेने का रुझान कम हो गया। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में व्यापक बिकवाली ने इक्विटी के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल को और बढ़ा दिया, जिससे निवेशकों ने जोखिम भरी संपत्तियों से अपना एक्सपोजर कम कर दिया।
IT सेक्टर में बड़ी गिरावट
इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर में सबसे तेज गिरावट देखी गई, Nifty IT इंडेक्स लगभग 2% टूट गया। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों द्वारा विवेकाधीन खर्च (discretionary spending) को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं, जो सीधे इन कंपनियों के रेवेन्यू आउटलुक को प्रभावित करती हैं। Infosys, Wipro, HCL Technologies, और Tata Motors (Passenger Vehicles) जैसे प्रमुख शेयर इसमें पिछड़ गए। Asian Paints में भी बिकवाली का दबाव देखा गया।
ऑटो और फार्मा सेक्टर में कुछ राहत
बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद, ऑटो और फार्मा सेक्टर ने कुछ चुनिंदा स्थिरता प्रदान की। Mahindra & Mahindra, Axis Bank, और Max Healthcare जैसे शेयरों में तेजी देखी गई, जो दर्शाता है कि निवेशक अभी भी कुछ खास सेक्टर्स में अवसर तलाश रहे हैं। इससे यह पता चलता है कि भले ही इंडेक्स का सेंटिमेंट कमजोर है, लेकिन सभी सेक्टर्स में एक समान बिकवाली नहीं है।
आगे क्या?
तकनीकी रूप से, इंडेक्स महत्वपूर्ण स्तरों के करीब कारोबार कर रहा है। बाजार प्रतिभागी तत्काल सपोर्ट के रूप में 24,000–24,100 जोन पर नजर रखे हुए हैं। इस स्तर को बनाए रखने में विफलता आगे और कमजोरी का संकेत दे सकती है। ऊपरी तरफ, 24,250–24,300 की रेंज में रेजिस्टेंस दिख रहा है। निवेशक फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (FII) के फ्लो पर भी नजर रख रहे हैं, क्योंकि हाल के सत्रों में लगातार शुद्ध बिकवाली ने कीमतों पर दबाव को बढ़ाया है। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों से संबंधित कोई भी अपडेट आने वाले सत्रों में बाजार के लिए मुख्य निगरानी बिंदु होंगे।
