15 सितंबर, 2026 को भारतीय बाजार में जोरदार बिकवाली देखी गई। ब्रेंट क्रूड के **$107** प्रति बैरल के पार जाने और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के **5%** के स्तर को पार करने से निवेशकों की घबराहट बढ़ गई है। Nifty 50 इंडेक्स **23,118.60** पर बंद हुआ है।
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई। Nifty 50 279.5 अंक या 1.19% टूटकर 23,118.60 पर सिमट गया, जबकि BSE Sensex 777.94 अंक यानी 1.04% की गिरावट के साथ 74,003.82 पर बंद हुआ। बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX भी 9% से ज्यादा उछल गया, जो आने वाले समय में बड़ी अस्थिरता की ओर इशारा कर रहा है।
ग्लोबल संकट और महंगाई की चिंता
बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल का $107 के ऊपर निकलना है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इंपोर्ट बिल बढ़ता है और देश में महंगाई का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5% के पार पहुंचना भी बड़ी चुनौती है। जब अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बाजारों में शिफ्ट करने लगते हैं। भारतीय रुपया भी कमजोर होकर 96 के स्तर के पास कारोबार कर रहा है, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ा हुआ है।
IT सेक्टर बना 'सेफ हेवन'
गिरावट के इस माहौल में IT सेक्टर ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी। Nifty IT इंडेक्स में 2% से ज्यादा का उछाल देखा गया, जिसमें Infosys और Tata Consultancy Services जैसे शेयरों में खरीदारी दिखी। ग्लोबल मार्केट में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर बदलती राय के चलते निवेशकों का मानना है कि IT कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस को अब खतरा कम है, जिससे इन शेयरों में रिकवरी दिखी है।
अब आगे क्या?
निवेशकों की नजरें अब ग्लोबल सेंट्रल बैंकों के ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेतों पर टिकी हैं। फिलहाल बाजार के लिए यह देखना जरूरी है कि क्या Nifty 50 अपने मुख्य सपोर्ट लेवल को बचा पाता है या विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
