भारतीय शेयर बाजार नए संवत **2083** में कदम रख रहा है, लेकिन यह शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण रही है। Nifty में **13%** की गिरावट दर्ज की गई है, जो **2014** के बाद से सबसे खराब प्रदर्शन है। इंडिया VIX के **30** के पार जाने से बाजार में तनाव का माहौल है।
संवत 2083 की शुरुआत निवेशकों के लिए उम्मीदों के बजाय चिंता लेकर आई है। Nifty में 13% की ईयर-ऑन-ईयर गिरावट ने पिछले एक दशक के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। बाजार में डर का माहौल इतना गहरा है कि इंडिया VIX (India VIX) 30 के स्तर को पार कर चुका है, जो रिटेल और इंस्टीट्यूशनल दोनों तरह के निवेशकों के बीच सतर्कता को दर्शाता है।
बाजार का मूड और पोर्टफोलियो में बदलाव
पिछले सालों की तुलना में, इस बार रिकवरी के संकेत बेहद सीमित हैं। Nifty का स्तर मई 2026 के निचले स्तरों पर आ चुका है। हालांकि IT और पब्लिक सेक्टर बैंकों ने कुछ सहारा देने की कोशिश की है, लेकिन मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्पेस में करेक्शन बहुत गहरा है। निवेशक अब 'ग्रोथ एट एनी कॉस्ट' वाली रणनीति छोड़कर उन कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं जिनके पास मजबूत फंडामेंटल्स और कम कर्ज (Debt) है।
क्रूड ऑयल का दबाव और महंगाई
मैक्रो-इकोनॉमिक मोर्चे पर क्रूड ऑयल की कीमतें $120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ऊर्जा की बढ़ती लागत कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डाल रही है, जिससे कंपनियों के लिए मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। महंगा होता हुआ कैपिटल (Capital) भी उन कंपनियों पर दबाव डाल रहा है, जिनकी वैल्यूएशन पहले के दौर में बहुत अधिक खींच दी गई थी।
आगे का रास्ता
यह करेक्शन पिछले दौर के लिक्विडिटी-ड्रिवन तेजी से बिल्कुल अलग है। अब बाजार का फोकस केवल अनुमानों पर नहीं, बल्कि कंपनियों की असली कमाई (Earnings) पर है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने के लिए VIX का ठंडा होना, कॉर्पोरेट रिजल्ट्स और महंगाई के आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण होंगे।
