भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता भी भारी रहा। 11 सितंबर, 2026 को Nifty 50 और BSE Sensex में लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का दबाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।
भारतीय बाजार में बिकवाली का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। 11 सितंबर, 2026 को कारोबार के अंत में Nifty 50 23,398.10 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि BSE Sensex 74,781.76 के स्तर पर सिमट गया। यह लगातार पांचवां हफ्ता है जब इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए हैं।
ग्लोबल फैक्टर्स का दबाव
बाजार की कमजोरी की बड़ी वजह कंपनी-स्पेसिफिक नहीं, बल्कि ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 प्रति बैरल के पार निकल गया है, जिससे महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने का डर पैदा हो गया है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 5% के करीब बने रहना इमर्जिंग मार्केट्स से विदेशी निवेश (FPIs) को अपनी ओर खींच रहा है।
सेक्टर में हलचल
शुक्रवार के सत्र में बाजार में मिली-जुली स्थिति दिखी। जहाँ मेटल, रियल्टी और ऑटो शेयरों में जोरदार बिकवाली देखी गई, वहीं HDFC Bank जैसे लार्ज-कैप शेयरों में खरीदारी ने गिरने की रफ्तार को कुछ हद तक थामने की कोशिश की। एक समय पर Sensex 700 पॉइंट से ज्यादा नीचे आ गया था।
बाजार का डर और उम्मीद
बाजार में डर का आलम यह है कि इंडिया VIX 4% से अधिक बढ़कर 12 के पार पहुंच गया है, जो आने वाले दिनों में और उतार-चढ़ाव के संकेत दे रहा है। निवेशकों की नजरें अब ग्लोबल ऑयल प्राइसेस और विदेशी फंड्स के रुख पर टिकी हैं। साथ ही, प्राइमरी मार्केट में आ रहे नए IPOs के बीच निवेशक अब पोर्टफोलियो को मैनेज करने में सावधानी बरत रहे हैं।
