भारतीय शेयर बाज़ार लगातार 7वें दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। ग्लोबल चिंताओं का असर बाज़ार पर साफ दिख रहा था, लेकिन FIIs और DIIs ने ₹4,400 करोड़ से ज़्यादा का निवेश करके बाज़ार को सहारा दिया।
लगातार 7वें दिन गिरावट
भारतीय शेयर बाज़ार में बुधवार, 19 अगस्त 2026 को भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। लगातार 7वें दिन की गिरावट के साथ, Nifty 50 इंडेक्स 0.32% लुढ़क कर 24,078.30 पर बंद हुआ, वहीं BSE Sensex 0.42% की नरमी के साथ 76,909.68 पर थमा।
संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की ज़बरदस्त खरीदारी
बाजार में गिरावट के बावजूद, संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की सक्रियता बनी रही। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने ₹407.99 करोड़ की खरीदारी की, वहीं डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹3,973.72 करोड़ का भारी निवेश किया। इस तरह, कुल मिलाकर करीब ₹4,380 करोड़ का संस्थागत निवेश हुआ। यह दिखाता है कि घरेलू निवेशक बाज़ार में विश्वास बनाए हुए हैं, भले ही ग्लोबल सेंटीमेंट (Global Sentiment) सतर्क हो।
गिरावट की मुख्य वजहें
बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक कारकों के कारण है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी, जो $91 से $92 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि देश तेल आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। इसके अलावा, अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे प्रमुख देशों में बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में वृद्धि से वहां के बाज़ार ज़्यादा आकर्षक हो गए हैं, जिससे उभरते बाज़ारों (Emerging Markets) में निवेश का आकर्षण कम हुआ है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के समाधान की कमी जैसी भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical Uncertainty) ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
सेक्टर का प्रदर्शन
सेशन के दौरान सेक्टरों में मिला-जुला प्रदर्शन देखने को मिला। Nifty IT इंडेक्स में 0.4% की तेज़ी देखी गई, जिसने चार दिन की गिरावट को रोका। गैस वितरकों (Gas Distributors) ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिसे पाइपलाइन गैस इंफ्रास्ट्रक्चर (Piped Gas Infrastructure) को बढ़ावा देने के सरकारी प्रोत्साहन का सहारा मिला। वहीं, ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों (Oil Refining Companies) पर बिकवाली का दबाव रहा, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आमतौर पर रिफाइनरों के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) को कम कर देती हैं।
आगे क्या?
अगले कुछ दिनों में निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या Nifty 50 इस गिरावट के सिलसिले को रोक पाता है। घरेलू खरीददारी और वैश्विक दबावों (जैसे क्रूड ऑयल की कीमतें और बॉन्ड यील्ड) के बीच का संतुलन बाज़ार की दिशा तय करेगा। कच्चे माल की लागत को लेकर कंपनियों के मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर भी नज़र रखी जा सकती है।
