ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते Nifty 50 अपने 2024 के उच्चतम स्तर से **14-15%** तक टूट चुका है। बाजार में पिछले 8 हफ्तों से लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है, जो पिछले 25 वर्षों में सबसे लंबा दौर है।
वैल्युएशन में बड़ा बदलाव
इन्वेस्टर्स के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि इंडेक्स का फॉरवर्ड P/E मल्टीपल अब 17x से 19x के दायरे में आ गया है, जो इसके ऐतिहासिक औसत से काफी सस्ता है। इसके अलावा, Nifty 50 की करीब 84% कंपनियां अपने 200-डे मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रही हैं, जो मार्केट में व्यापक कमजोरी का संकेत है।
गिरावट के मुख्य कारण
बाजार पर दबाव की तीन बड़ी वजहें हैं:
- क्रूड ऑयल: ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ रहा है।
- US बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10-साल की ट्रेजरी यील्ड 5.25% से 5.3% के ऊंचे स्तरों पर बनी हुई है, जो ग्लोबल इन्वेस्टर्स को इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर अमेरिकी सुरक्षित एसेट्स में लगाने के लिए मजबूर कर रही है।
- FPI आउटफ्लो: सितंबर 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली ने लार्ज-कैप शेयरों की कमर तोड़ दी है।
आगे की राह
दिलचस्प बात यह है कि बाजार के गिरते भाव के बावजूद, कंपनियों का बिजनेस मजबूत बना हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में बड़ी कंपनियों का मुनाफा साल-दर-साल आधार पर 14% बढ़ा है। फिलहाल, निवेशक अपना पैसा लार्ज-कैप से निकालकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में डाल रहे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की चाल FPI निवेश, तेल की कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों के फैसलों पर निर्भर करेगी।
