शेयर बाजार में आज थोड़ी राहत देखने को मिली। Nifty 50 ने लगातार 7 दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया है। अप्रैल के निचले स्तर से इंडेक्स लगातार ऊंची उड़ान भर रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी जैसे ग्लोबल फैक्टर अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
बाजार में दिखी रिकवरी की उम्मीद
भारतीय शेयर बाजार ने आज उम्मीद की किरण दिखाई है। Nifty 50 इंडेक्स ने लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट को थाम लिया है। 21 अगस्त 2026 को 24,284.05 के स्तर पर खुलने के बाद, इंडेक्स में कुछ सुधार देखने को मिला। यह हाल के हफ्तों में बाजार की सुस्ती के बीच एक सकारात्मक संकेत है, जो घरेलू निवेशकों के उत्साह और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच की लड़ाई को दर्शाता है।
अप्रैल के निचले स्तर से मजबूत उछाल
2 अप्रैल 2026 को 22,182.55 के निम्नतम स्तर को छूने के बाद से, Nifty 50 में लगभग 6.85% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इंडेक्स में लगातार 'हायर हाई' (ऊंचे शिखर) और 'हायर लो' (ऊंचे निचले स्तर) का पैटर्न बन रहा है। सरल शब्दों में कहें तो, बिकवाली के दौर में भी खरीदार पहले से ऊंची कीमतों पर खरीदारी कर रहे हैं, जो मध्यम अवधि में बाजार की मजबूती का संकेत माना जाता है।
ग्लोबल चुनौतियां अभी भी हावी
इस सुधार के रास्ते में कई बड़ी बाधाएं हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें $93 से $94 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं। ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता कम हो सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जहां 10-वर्षीय यील्ड 4.7% के करीब है। जब अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो यह भारत जैसे उभरते बाजारों से पूंजी को आकर्षित कर सकती है, जिससे लिक्विडिटी और स्टॉक वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों का मजबूत सहारा
घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को बड़ा सहारा दिया है। विदेशी निवेशकों ने जहां अप्रैल से लगभग ₹1.09 ट्रिलियन की बिकवाली की है, वहीं DIIs ने इसी अवधि में करीब ₹2.8 ट्रिलियन के शेयर खरीदे हैं। इस जोरदार घरेलू खरीदारी ने बाजार में अस्थिरता के दौरान गिरावट को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आगे क्या? महत्वपूर्ण टेक्निकल लेवल
बाजार सहभागियों की नजरें अब टेक्निकल लेवल्स पर टिकी हैं। 24,280 और 24,360 का ज़ोन एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) के रूप में देखा जा रहा है। इंडेक्स को 24,360 के ऊपर टिके रहने की जरूरत है ताकि एक मजबूत रिकवरी की पुष्टि हो सके। नीचे की ओर, 24,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट (समर्थन) का काम करेगा; इस स्तर के टूटने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और घरेलू खरीदारी का विदेशी बिकवाली पर भारी पड़ने पर बारीकी से नजर रखनी होगी। बाजार के इस सुधारात्मक चरण में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इंडेक्स इन ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद अपने सपोर्ट लेवल को बनाए रख पाता है या नहीं।
