12 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और यूएस इन्फ्लेशन डेटा से पहले निवेशकों की सावधानी के चलते Nifty 50 और Nifty फ्यूचर्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि, बाजार में कमजोरी के बावजूद NSE ने आज Nifty India FPI 150 Index के लिए नए फ्यूचर्स और ऑप्शन्स कॉन्ट्रैक्ट्स लॉन्च किए।
क्यों आई बाजार में गिरावट?
12 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट देखी गई, जिसमें Nifty 50 और Nifty फ्यूचर्स दोनों पर दबाव रहा। शुरुआती कारोबार में Nifty 50 इंडेक्स 24,400 के स्तर से नीचे फिसल गया। यह गिरावट पिछले सत्र के नुकसान को बढ़ाते हुए हुई, क्योंकि निवेशक वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक विकास पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
बाजार की धारणा पर सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है, जो $90 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। यह उछाल अमेरिका-ईरान संबंधों में बढ़ी भू-राजनीतिक तल्खी और मध्य पूर्व के शिपिंग मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के कारण आया है। इन चिंताओं से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है और ऊर्जा की लागत बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त, बाजार प्रतिभागी महत्वपूर्ण US कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) इन्फ्लेशन डेटा जारी होने का इंतजार कर रहे हैं, जो अक्सर वैश्विक बाजार के रुझानों और केंद्रीय बैंक की नीतियों को प्रभावित करता है।
सेक्टर का प्रदर्शन कैसा रहा?
सत्र के दौरान सेक्टर प्रदर्शन मिश्रित रहा। जहां व्यापक बाजार में मंदी का रुख बना रहा, वहीं कुछ सेक्टर्स ने मजबूती दिखाई। शुरुआती कारोबार में Nifty PSU Bank और Nifty Metal जैसे सेक्टर्स में बढ़त दर्ज की गई, जिसने समग्र गिरावट को कुछ हद तक संभाला। इसके विपरीत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी (FMCG) और आईटी (IT) जैसे सेक्टर्स में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे इंडेक्स नीचे आ गए।
NSE का नया कदम
बाजार की इन हलचलों के बीच, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने आज से Nifty India FPI 150 Index पर फ्यूचर्स और ऑप्शन्स (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स लॉन्च करने की घोषणा की है। यह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा पसंदीदा कंपनियों में एक्सपोजर या हेजिंग की तलाश करने वाले ट्रेडर्स के लिए एक नया साधन होगा।
तकनीकी रूप से, Nifty 50 के लिए 24,400 के आसपास एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल है। बाजार पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि इंडेक्स इस स्तर को बनाए रखने में विफल रहता है, तो यह 24,200 या 24,000 के स्तर तक नीचे जा सकता है। रिकवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि इंडेक्स अपनी वर्तमान सपोर्ट को बनाए रख पाता है या नहीं और वैश्विक ऊर्जा मूल्य अस्थिरता के बीच स्थिरता पाता है। आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा के लिए निवेशक आने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति डेटा और भू-राजनीतिक स्थिरता पर किसी भी अपडेट पर बारीकी से नजर रखेंगे।
