सितंबर 2026 में Nifty 50 में **5.67%** की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले आठ वर्षों में इसका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और घरेलू मांग में कमी के चलते इंडेक्स के 50 में से 40 शेयर लाल निशान में बंद हुए हैं।
सितंबर 2026 में Nifty 50 इंडेक्स 22,716.20 के स्तर पर बंद हुआ। यह अपने रिकॉर्ड हाई 26,373.20 से अब करीब 14% नीचे आ चुका है। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि इंडेक्स के 50 में से 40 शेयरों को नुकसान झेलना पड़ा।
गिरावट की असली वजह
बाजार में इस गिरावट के पीछे कई ग्लोबल और घरेलू कारण रहे। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड (US Bond Yields) बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से विदेशी निवेशकों ने अपना पैसा इक्विटी से निकालकर सुरक्षित एसेट क्लास में लगाना शुरू कर दिया। वहीं, देश में ऑटो सेल्स और रेलवे फ्रेट के आंकड़े यह इशारा कर रहे हैं कि इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त पड़ रही है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
IT शेयरों में बड़ी बिकवाली
हाई-वैल्यूएशन स्टॉक्स पर निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा, जिसमें Tata Consultancy Services 13.70%, Wipro 12.43% और Infosys 11.52% तक लुढ़क गए।
Adani Ports ने बचाई लाज
गिरावट के इस माहौल में भी Adani Ports ने निवेशकों को राहत दी और महीने के दौरान 9.45% की तेजी दिखाई। यह साबित करता है कि खराब बाजार में भी अच्छी परफॉरमेंस वाले शेयर अपनी चाल खुद तय कर सकते हैं।
आगे की राह अब कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख और भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की कड़ी नजर रहेगी।
